Indigenous Youth Organisation : ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) में बांग्लादेशी घुसपैठियों एवं अवैध मस्जिदों के विरुद्ध युवाओं का आंदोलन !

ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) – यहां २४ अक्टूबर को ‘अरुणाचल प्रदेश इंडिजिनस यूथ ऑर्गनाइजेशन’ के नेतृत्व में ‘ऑल कैपिटल कॉम्प्लेक्स यूथ वेलफेयर एसोसिएशन’ तथा ‘ऑल नाहरलागुन यूथ वेलफेयर एसोसिएशन’ के सैकडों युवा कार्यकर्ताओं ने सडकों पर उतरकर बांग्लादेशी घुसपैठियों एवं अवैध मस्जिदों के विरुद्ध आंदोलन किया ।

उनके हाथों में ‘बांग्लादेशी घुसपैठिये वापस जाओ’ तथा ‘अरुणाचल प्रदेश बचाओ’ जैसे नारे लिखे पोस्टर थे । इस समय यह चेतावनी दी गई कि “यदि सरकार ने १५ दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं की, तो राज्यव्यापी आंदोलन छेडा जाएगा ।”

अरुणाचल में मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण तथा मुसलमानों की घुसपैठ

म्यानमार की सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश में वर्तमान में ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण तथा मुसलमानों की घुसपैठ के दो गंभीर संकट उत्पन्न हो गए हैं । इस घुसपैठ के कारण स्थानीय समाज त्रस्त है एवं युवाओं में आक्रोश भडक गया है ।

आंदोलनकारियों की मांग :

आंदोलनकारियों की मांग है कि ईटानगर एवं नाहरलागुन शहरों में मुसलमानों ने अवैध रूप से भूमि नियंत्रित कर के १६ से २० मस्जिदें तथा धार्मिक स्थल बना लिए हैं । प्रशासन को उन्हें तत्काल हटाना चाहिए ।

अरुणाचल की सांस्कृतिक पहचान संकट में !

‘अरुणाचल प्रदेश इंडिजिनस यूथ ऑर्गनाइजेशन’ के अध्यक्ष तारो सोनम लियाक ने बताया कि प्रतिदिन लगभग १-२ हजार मुसलमान ‘इनर लाइन परमिट’ (पडोसी देशों के नागरिकों को भारतीय भूमि में कुछ दूरी तक प्रवेश करने का परमिट) दिखाकर अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये लोग परमिट दिखाते हैं; परंतु पश्चात भीड में छिप जाते हैं तथा वापस अपने मूल स्थान पर नहीं जाते । बढती इस्लामी आबादी के कारण राज्य का जनसांख्यिकीय स्वरूप परिवर्तित हो रहा है, साथ ही सांस्कृतिक एवं सामाजिक सुरक्षा को भी गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है । बाहरी लोगों के बढते ठिकानों के कारण नशीले पदार्थों तथा नशे की लत की समस्याएं बढ रही हैं एवं स्थानीय युवा इसके चंगुल में फंस रहे हैं । यदि सरकार ने समय पर कदम नहीं उठाए, तो अरुणाचल की सांस्कृतिक पहचान ही संकट में पड जाएगी ।

राज्य के मुख्य सचिव को पत्र दिया

इन समस्याओं के संबंध में आंदोलनकारी संगठनों ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव को दो पन्नों का ज्ञापन दिया है । इस पत्र में ‘राजधानी क्षेत्र के सभी अवैध मस्जिदों एवं मदरसों को तत्काल हटाने तथा बांग्लादेशी घुसपैठियों को निर्वासित करने’ की मांग की गई है ।
पत्र में आगे कहा गया है, “यहां १३,७३० मुसलमान रहते हैं, जिनमें से २० प्रतिशत बांग्लादेशी हैं, जो स्थानीय लोगों के लिए गंभीर संकट बन रहे हैं, साथ ही राज्य सरकार की जानकारी में १० से अधिक अवैध मस्जिदें चलाई जा रही हैं । इसलिए इस क्षेत्र में मात्र २ आधिकारिक मस्जिदों को अनुमति दी जाए तथा शेष सभी को हटाया जाए ।”

साप्ताहिक बाजारों पर प्रतिबंध की मांग

राजधानी क्षेत्र एवं आसपास के दोईमुख, होलोंगी जैसे क्षेत्रों के साप्ताहिक बाजारों पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है । इन बाजारों में बडी संख्या में अवैध यात्री व्यापारी के रूप में आते हैं तथा किराए के कमरों में रहते हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों को बडा संकट उत्पन्न हो गया है ।

‘इनर लाइन परमिट’ का दुरुपयोग बढा !

सीमावर्ती राज्य होने के कारण अरुणाचल प्रदेश में बाहरी नागरिकों के प्रवेश के लिए ‘इनर लाइन परमिट’ अनिवार्य है; परंतु स्थानीय संगठनों का कहना है कि इस अनुमति का दुरुपयोग करके बडी संख्या में अवैध बस्तियां बनाई जा रही हैं, जिससे राज्य की पहचान पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है ।

संपादकीय भूमिका

जनता को ऐसा आंदोलन क्यों करना पड़ता है ? सरकार घुसपैठियों को बाहर क्यों नहीं निकालती ? अवैध मस्जिदों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती ?