देश की सुरक्षा पर भीषण संकट : ‘परमाणु बम डिजाइन’ से सम्बन्धित अत्यन्त संवेदनशील मानचित्र (नक्शा रखनेवाले बनावटी धर्मांध वैज्ञानिक को बंदी बनाया गया !

‘भाभा परमाणु अनुसन्धान केन्द्र’ का बनावटी (झूठा) पहचान पत्र एवं संवेदनशील कागजात (दस्तावेज) नियंत्रित ।

अख्तर हुसेन कुतुबुद्दीन अहमद

मुम्बई – ‘भाभा परमाणु अनुसन्धान केन्द्र’ (‘बी.ए.आर.सी.’ – ‘भाभा अटॉमिक रिसर्च सेन्टर’) का वैज्ञानिक होने का नाटक करनेवाले अख्तर हुसेन कुतुबुद्दीन अहमद नामक व्यक्ति को मुम्बई अपराध शाखा ने राष्ट्रीय अन्वेषण तंत्र (एन.आई.ए. – नॅशनल इन्व्हेस्टिगेशन एजन्सी) एवं गुप्तचर विभाग (आई.बी.) के संयुक्त कार्रवाई में बंदी बना बनाया गया । उस के वर्सोवा स्थित निवासस्थान की जांच करने के पश्चात् सीधे ‘परमाणु बम डिजाइन से सम्बन्धित १४ अत्यन्त संवेदनशील मानचित्र एवं कागजात मिले हैं । यह कागजात देश की परमाणु सुरक्षा की दृष्टि से अत्यन्त गोपनीय माने जाते हैं । इन नियंत्रित किए गए मानचित्रों में से कुछ मानचित्र अंधेरी की एक स्थानीय दुकान में छपवाए गए थे, ऐसी जानकारी अन्वेषण में उजागर हुई है । ये मानचित्र ठीक से कहां से मिले ?, इस का अन्वेषण जारी है ।

१. आरोपी अख्तर का अन्तरराष्ट्रीय अथवा आतंकवादी संगठनों सहित सम्बन्ध होने की प्रबल सम्भावना है । उसके किसी के कहने पर भारत की गोपनीय जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहा होने की भी सम्भावना है । इस घटना के कारण भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बडा संकट उत्पन्न हो गया है ।

२. इस धर्मांध के पास रहनेवाला अली रजा हुसैनी इस नाम का ‘बी.ए.आर.सी.’ का बनावटी पहचान पत्र जब्त किया गया । इस पहचान पत्र पर अख्तर का छायाचित्र लगाया गया था । इस कार्ड का उपयोग कर अख्तर ने ‘बी.ए.आर.सी.’ परिसर के प्रतिबन्धित क्षेत्र में प्रवेश प्राप्त किया था क्या ? अथवा संवेदनशील जानकारी अथवा छायाचित्र (फोटो) ली थीं क्या ?, इस की जांच जारी है ।

३. इस धर्मांध आरोपी के घर से अनेक झूठे पारपत्र (पासपोर्ट), आधार कार्ड, पॅन कार्ड एवं वाहन चलाने का प्रमाणपत्र (ड्राइविंग लाइसेन्स), साथ ही अनेक भ्रमणभाष ( मोबाइल) समूह एवं पेन ड्राइव अधिग्रहित (जब्त) किए गए । यह साहित्य एवं अन्य डिजिटल उपकरण आगे की फॉरेन्सिक पडताल के लिए भेजे गये हैं । इस से महत्त्वपूर्ण प्रमाण (सबूत) मिलनेवाले हैं ।

४. अख्तर हुसेन अपनी पत्नी एवं पुत्र सहित वर्सोवा स्थित फ्लॅट में रह रहा था । उस की इन कार्यवाहियों में उन का कुछ सहयोग था क्या ? इस की जांच की जा रही है ।

संपादकीय भूमिका

अब तक बडी संख्या में भारतीय वैज्ञानिकों की सन्दिग्ध मृत्यु भी हुई हैं । अब इस घटना से शत्रु की पहुंच कहां तक है, यह भी ध्यान में आता है । इस सन्दर्भ में सम्बन्धित सुरक्षा तंत्र कहां कम पड गये, इस का अध्ययन एवं उन पर कार्रवाई भी सामने आनी चाहिए ।