बैठकर काम करनेवालों के स्वस्थ जीवन हेतु ५ मिनट के प्रभावकारी व्यायाम !

स्वस्थ जीवन हेतु व्यायाम

‘पूरा दिन खेत में अति परिश्रम कर घर चलानेवाला मानव भौतिक विकास के कारण आजकल पूरा दिन अनेक घंटे एक ही स्थान पर बैठकर काम कर रहा है । पूरा विश्व संगणक एवं चल-दूरभाष (मोबाइल) में समाए रहने से मनुष्य का अधिकांश समय उसमें ही व्यर्थ जा रहा है । इस प्रकार की बैठी जीवनशैली के कारण अज्ञानवश शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत परिणाम होता है  । निरंतर इस जीवनशैली के कारण जोडों एवं मांसपेशियों की समस्याएं, हृदय एवं नसों से संबंधित बीमारियां, आंखों की समस्याएं; केवल इतना ही नहीं, पेट के विकार एवं मानसिक थकान का भी समावेश है । इन बीमारियों को अल्प करने हेतु काम की अति-व्यस्तता में भी नियमित व्यायाम करना अत्यंत आवश्यक है । विशेषकर प्रति २ घंटे पश्चात केवल ५ मिनट व्यायाम करने से स्वास्थ्य की दृष्टि से लक्षणीय लाभ मिलते हैं ।

व्यायाम करने से मांसपेशियों पर आनेवाला तनाव दूर होकर मांसपेशियां ढीली होती हैं, साथ ही मांसपेशियों में रक्तसंचरण सुचारू होता है । उसके कारण अनेक शारीरिक दुष्परिणाम टाले जा सकते हैं । पिछले पाक्षिक में प्रकाशित हुए लेख में आपने ‘पांच मिनट के व्यायाम का गांभीर्य ध्यान में लें, पांच मिनट के व्यायाम करने से संबंधित सूचनाएं और खडे होकर करने योग्य व्यायाम प्रकार’ पढा था । आज इस लेख का अगला भाग यहां दे रहे हैं ।

१. आसंदी (कुर्सी) पर बैठकर किए जानेवाले व्यायाम के प्रकार

१ अ. ठुड्डी अंदर लेना (चित्र ६)

(चित्र ६)

१. पीठ को सीधे रखकर आसंदी से टेककर बैठें । इस समय ठुड्डी (चिबुक) भूमि के समानांतर होनी चाहिए ।

२. पहले ठुड्डी को अंदर लेकर गर्दन को यथासंभव सीधी रेखा में पीछे ले जाएं ।

३. उसके पश्चात ठुड्डी पर उंगलियां रखकर उंगलियों की सहायता से गर्दन को और पीछे ले जाने का प्रयास करें ।

४. १ से ५ तक गिनती करने तक इसी स्थिति में रहें तथा उसके पश्चात पूर्वस्थिति में आएं । ऐसा ५ बार करें ।

इस व्यायाम से यदि कष्ट होता हो, तो गर्दन के अन्य व्यायाम अर्थात ‘गर्दन को एक बाजू में मोडना, बाईं एवं दाहिनी ओर मोडना तथा गोलाकार घुमाना’ आदि व्यायाम भी कर सकते हैं ।

१ आ. कंधों को गोलाकार घुमाना (चित्र ७)

कंधों को सामने से पीछे की दिशा में गोलाकार घुमाना

१. दोनों हाथों की उंगलियों को कंधे पर रखकर कोहनी को सीधी रेखा में कान के निकट लेकर छत की दिशा में ले जाएं ।

श्रीमती अक्षता रेडकर

२. उसके उपरांत दोनों हाथों की कोहनियों को जितना संभव है, उतना पीछे ले जाएं । कंधों को केवल सामने की दिशा से ही गोलाकार घुमाएं ।

यह व्यायाम ५ बार करें । यह व्यायाम करने से कंधा तथा कंधे के पीछे की हड्डी (स्कैपुला) की संपूर्ण गतिविधि होने से मांसपेशियां खुलने में सहायता मिलती है ।

१ इ. हथेली को ऊपर-नीचे करना

१. दोनों हाथों को भूमि के समानांतर कंधे की रेखा में सीधे ले जाएं । इस समय ‘कोहनियां मुडें नहीं’, इसका ध्यान रखें ।

२. हाथ का पंजा सीधे रखकर हथेली को केवल कलाई से हिलाएं । हथेली को ऊपर ले जाते समय उंगलियां सीधी रखने का प्रयास करें । (चित्र ८ अ) हथेली को नीचे की दिशा में ले आते समय हाथ की मुट्ठी बनाएं । (चित्र ८ आ)

यह व्यायाम ५ बार करें ।

१ ई. बैठकर आगे झुकना

 १. दृष्टि सामने रखें ।

२. रीढ की हड्डी को सीधे रखकर कमर से धीरे से आगे झुकें तथा ऐसा करते समय दोनों हाथों से कुर्सी को पकडकर रखें । (चित्र ९ अ)

३. १ से १० तक गिनती करने तक इसी स्थिति में रहें ।

४. उसके उपरांत दाहिना पैर बाएं पैर की जंघा पर रखकर उक्त कृति करें ।

इस प्रकार यह व्यायाम दोनों पैरों को बदल-बदल कर २-२ बार करें ।

– श्रीमती अक्षता रूपेश रेडकर, भौतिकोपचार विशेषज्ञ (फीजियोथेरपिस्ट), फोंडा, गोवा. (२५.७.२०२४)