वाराणसी के ‘अशोका स्कूल ऑफ बिजनेस’ इंस्टीट्यूट में विद्यार्थियों के लिए ‘तनाव मुक्ति के लिए अध्यात्म’ विषय पर प्रवचन

उत्तर प्रदेश में ‘तनाव मुक्ति हेतु अध्यात्म’ विषय पर प्रवचन

(बाएं से) श्री. राजन केशरी,सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी को स्मृतिचिन्हदेकर सम्मान करते हुए डॉ. बृजेश सिंह

वाराणसी (उ.प्र.) – ‘‘वर्तमान में बढती प्रतियोगिता के कारण समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ-साथ विद्यार्थी भी तनाव में हैं । तनाव के कारण शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक कष्ट भी होते हैं । तनाव पर नियंत्रण कैसे पाया जाए, यह न जानने के कारण समाज में व्यसन, अपराध, आत्महत्या इत्यादि की घटनाएं बढती ही जा रही हैं । इस तनाव को दूर करने के लिए साधना ही स्थायी समाधान है ।’’, ऐसे वक्तव्य सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी ने व्यक्त किए । वे वाराणसी के पहाडिया स्थित ‘अशोका स्कूल ऑफ बिजनेस’ इंस्टीट्यूट में आयोजित ‘तनाव मुक्ति के लिए अध्यात्म’ विषय पर BBA तथा B.Com के छात्रों को संबोधित कर रहे थे । इस समय लगभग २५० विद्यार्थी तथा शिक्षक उपस्थित थे । अंत में छात्रों ने तनाव से संबंधित अपने मन की शंकाएं भी
पूछीं । अशोका स्कूल ऑफ बिजनेस की कॉमर्स विभाग की प्रमुख डॉ. सारिका सिंह ने विषय की सराहना करते हुए कहा कि तनाव नियंत्रण के लिए बताए गए प्रयास बहुत रोचक तथा प्रेरक थे, जिससे विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन भी हुआ है । भविष्य में भी इसी प्रकार के महत्त्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन करने की इच्छा उन्होंने व्यक्त की । ‘अशोका स्कूल ऑफ बिजनेस’ इंस्टीट्यूट की ओर से सद्गुरु निलेश सिंगबाळजी को स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया ।


तनाव से मुक्त होने के लिए व्यापारियों को मार्गदर्शन !

सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी एवं अन्य मान्यवर

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – ‘‘वर्तमान में बढती प्रतियोगिता तथा बाजार में होनेवाले उतार-चढाव इत्यादि के कारण व्यापारी वर्ग अत्यधिक तनाव में है । इस तनाव को दूर करने के लिए अन्य उपायों के साथ-साथ नामजप साधना ही स्थायी समाधान है’’, ऐसे वक्तव्य सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी ने व्यक्त किए । वे वाराणसी के नया पान दरीबा प्रांगण में श्री बरई सभा काशी, चौरसिया व्यापार मंडल तथा वाराणसी व्यापार मंडल के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित एक कार्यक्रम में मार्गदर्शन कर रहे थे । वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्री. अजीत सिंह बग्गा जी एवं चौरसिया व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्री. सुनील चौरसिया ने राष्ट्र एवं धर्म पर एक परिसंवाद का आयोजन किया था ।