फरवरी २०२४ में भारतीय कम्युनिस्ट दल (मार्क्सवादी) ने केरल के कोजिकोड जिले के नेदुमन्नूर एल.पी. विद्यालय के प्रांगण में आयोजित गणपति याग (यज्ञ) पर आपत्ति जताई थी । इससे भारतीय कम्युनिस्ट दल (मार्क्सवादी) ने धर्म के संदर्भ में पुनः एक बार अपना पाखंड दिखा दिया है । केरल राज्य के सत्ताधारी दल ने यह स्पष्ट किया है कि वहां हिन्दुओं एवं मुसलमानों के साथ किए जानेवाले व्यवहार में भेदभाव किया जाता है । कुछ दिन पूर्व ही केरल के पूर्व गृहमंत्री कोडियेरी बालकृष्णन् के पुत्र मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के सदस्य बिनेश कोडियेरी ने सामाजिक माध्यमों पर एक वीडियो प्रसारित किया था, जिसमें टोपी पहना एक व्यक्ति मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के कार्यालय के प्रांगण में नमाज पढता हुआ दिखाई देता है ।

१. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल का मुस्लिम प्रेम उमड पडा !
‘एक्स’ उपयोगकर्ता आनंद के अनुसार यह व्यक्ति कोल्लम का फेरीवाला है, जो अपनी जीविका चलाने के लिए बेडशीट बेचता है । उस समय बाहर वर्षा हो रही थी; इसलिए उस मुसलमान ने स्थानीय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के कार्यकर्ताओं से नमाज पढने के लिए स्थान मांगा था । दल ने उसे नमाज पढने के लिए कार्यालय के एक स्थान का उपयोग करने की अनुमति दे दी ।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के नेता बिनेश कोडियेरी ने सामाजिक माध्यमों पर की हुई पोस्ट में कहा है, ‘जब कोई मनुष्य वर्षा में भीगकर अपनी आस्था से प्रार्थना करने के लिए स्थान मांगता है, उस समय राजनीतिक दल का कार्यालय उसके लिए स्थान उपलब्ध कराता है । उसके कारण उन लोगों की श्रद्धा संजोने के लिए अनुकूल स्थिति उत्पन्न होती है । मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल लोगों की श्रद्धा एवं भलाई की रक्षा करनेवाला दल है । प्रेम एवं भाईचारा हमारे राज्य की सबसे बडी शक्ति हैं ।’ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल ने उस मुसलमान को अपने कार्यालय में नमाज पढने की अनुमति दिए जाने के निर्णय का वर्णन ‘प्रेम एवं भाईचारा’ कहकर किया । संयोग से हिन्दुओं के संदर्भ में इस दल का इस प्रकार का सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण, सहिष्णुता एवं अनुकूल वृत्ति कभी भी दिखाई नहीं देती ।
२.हिन्दुओं के धार्मिक अनुष्ठान रोकनेवाली मार्क्सवादियों की हिन्दूद्वेषी मानसिकता
फरवरी २०२४ में भारतीय कम्युनिस्ट दल ने केरल के कोजिकोड जिले के नेदुमन्नूर एल.पी. विद्यालय के प्रांगण में आयोजित गणपति याग (यज्ञ) पर आपत्ति जताई । इस दल के गुंडों को स्थानीय लोगों द्वारा इस यज्ञ की जानकारी मिली तथा उन्होंने उसे रोक दिया । उन गुंडों ने यज्ञ के आयोजकों पर भी आक्रमण किया । उसके लिए पुलिस को बुलाया गया । पुलिस ने आयोजकों को बंदी बनाया । इस दल के गुंडों ने विद्यालय परिसर में विरोध मोर्चा निकाला । इस विद्यालय ने अधिकारियों की पूर्वानुमति से ही इस यज्ञ का आयोजन किया था, उसके पश्चात भी ऐसा हुआ । परंपरा के अनुसार प्रतिवर्ष महानवमी के दिन पूजा की जाती है; परंतु इस वर्ष यह कार्यक्रम निरस्त होने से विद्यालय ने गणपति याग (यज्ञ) आयोजित किया; परंतु ऐसा कर असहिष्णु मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल हिन्दुओं को उनके धर्माचरण के अधिकार का उपयोग करने से रोक नहीं सका ।
३. ज्योतिषी से मिलनेवाले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के नेता की जांच !
अगस्त २०२५ में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन् महाव पोडवाल नामक हिन्दू ज्योतिषी से मिले; इसलिए उनकी जांच की गई । ‘ज्योतिषशास्त्र’ पर चर्चा करने के कारण उनके दल को आलोचना झेलनी पडी । इसके कारण संबंधित ज्योतिषी को स्पष्टीकरण देना पडा कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के नेता उसके परिजनों से मिलने तथा चाय पीने के लिए आए थे । ‘इस भेंट में, ज्योतिषशास्त्र से संबंधित किसी प्रकार की चर्चा नहीं हुई’, महाव पोडवाल ने यह स्पष्ट किया । उन्होंने कहा, ‘व्यक्तिगत संबंधों को ज्योतिषशास्त्र से न जोडें । ‘गोविंदन् गुरु ने उनका ज्योतिष जांचा’, किसी ने यदि ऐसा कहा, तो वह मुझे सहन नहीं होगा ।’ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के नेता तथा केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन् से भी मेरे व्यक्तिगत संबंध हैं, पोडवाल ने यह भी स्पष्ट किया ।
४. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल को हिन्दू धर्म से संबंधित प्रत्येक कृति पर आपत्ति
जुलाई २०२२ में भारतीय कम्युनिस्ट दल ने (मार्क्सवादी) राष्ट्रीय चिह्न के अनावरण के समय में पूजा आयोजित करने पर आपत्ति जताई । पूरे विश्व में एकमात्र हिन्दू राष्ट्र नेपाल द्वारा राजशाही हटाने में भी इस दल की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है ।
५. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल का हिन्दू विरोधी प्रचार
फरवरी २०२५ में ‘ऑप इंडिया’ ने ब्योरा दिया कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल ने अपने ६४ पृष्ठों के ब्योरे में किस प्रकार हिन्दू विरोधी अभियान चलाया । मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के राजनीतिक प्रस्ताव के ब्योरे के १८वें पृष्ठ पर दल ने पहले के नेपाल के ‘हिन्दू राष्ट्र’ में हिन्दू शक्तियों के उदय के विरुद्ध उन्मादपूर्ण षड्यंत्र रचा । अपने कुत्सित हिन्दू विरोधी एजेंडा के अंश के रूप में ‘राजशाही समर्थक शक्तियां पुनः एक बार लोगों में मान्यता प्राप्त करने के लिए तथा वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरने के लिए लोकप्रिय असंतोष का उपयोग करने का प्रयास कर रही हैं । हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के घटक इन शक्तियों को सक्रिय समर्थन दे रहे हैं । मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल ने यह दावा किया कि ‘नए सिरे से स्वीकार किया हुआ धर्मनिरपेक्ष संविधान एवं कम्युनिस्ट दल के विरुद्ध अभियान चला रहे हैं ।’
मंदिरों में प्रार्थना करने के विषय में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल ने अपने दल के नेता को लगाई फटकार !

सितंबर २०१७ में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल ने उनके मंत्री कडकमपल्ली सुरेंद्रन् ने त्रिशूर के प्राचीन श्री गुरुवायूर मंदिर में जाने के कारण तथा उनके परिवार के सदस्यों के बताए अनुसार मंदिर में पुष्पांजलि समर्पित करने के कारण फटकार लगाई । उसे मुंडू एवं मेलमुंडू में लपेटा गया था । सामाजिक माध्यमों में प्रसारित छायाचित्रों में वे चंदनकुरी (चंदन) धारण करते हुए दिखाई दिए थे । उस समय सुरेंद्रन् के बच्चे भगवान श्रीकृष्ण की वेशभूषा में थे । उस समय वे केरल के देवस्वम् मंत्री थे । मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के इस नेता का आचरण दल के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था, पक्ष की आंतरिक समिति ने ऐसा घोषित किया । केवल कडकम्पल्ली सुरेंद्रन् के मंदिर जाने के आधार पर जांच ब्योरा भी प्रस्तुत किया गया । दल की समिति ने यह घोषित किया कि इस प्रकार श्री गुरुवायूर मंदिर में पूजा करना मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल के सिद्धांतों के विरुद्ध है । उन्होंने कडकमपल्ली सुरेंद्रन् को दल के अन्य नेताओं के कदम पर कदम रखकर चलने के निर्देश दिए ।
(साभार : ‘ऑप इंडिया’ का जालस्थल)
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