स्थानक को छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम देने की हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति की सरकार से मांग !

बेंगलुरू (कर्नाटक) – ब्रिटिश देश छोडकर ७८ वर्ष पूरे हुए, तब भी भारत में रेल स्थानकों को ब्रिटिश एवं ईसाई नाम देकर किसी विशिष्ट समूह को संतुष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है । इसके लिए बेंगलुरू के शिवाजीनगर के नए मेट्रो स्थानक को ‘सेंट मेरी’ नाम देने की कोई आवश्यकता नहीं है । हमें ब्रिटिशों की पहचान नहीं चाहिए, अपितु हमें हमारी भारत की पहचान चाहिए । क्या आप इस शहर को ईसाई शहर अथवा वैटिकन सिटी बनाना चाहते हैं ? यदि आपने हमारी मांग नहीं मानी, तो हम आंदोलन करेंगे, ऐसी चेतावनी श्रीराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री. प्रमोद मुतालिक ने दी । उक्त विषय पर हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति के नेतृत्व में विभिन्न हिन्दू संगठनों तथा शिवाजीनगर के नागरिकों ने ‘बेंगलुरू मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड’के प्रबंधकीय निदेश को ज्ञापन प्रस्तुत किया, उस समय श्री. मुतालिक ऐसा बोल रहे थे ।
इस अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति के राज्य प्रवक्ता श्री. मोहन गौडा, शिवाजीनगर के आंजनेय स्वामी मंदिर के न्यासी श्री. प्रदीप कुमार, वीर शिवाजी सेना के श्री. कमलेश राव, शिव गर्जना सेना के श्री. दीपक चौहान, श्रीराम सेना के श्री. सुंदरेश नगरल एवं श्री. मंजुनाथ, दुर्गा सेना की श्रीमती सरस्वती प्रवीणसहित अन्य मान्यवर उपस्थित थे ।
ज्ञापन में रखे गए सूत्र –
१. वर्ष १६३० से १६४० की अवधि में छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने पिता शहाजी महाराज के साथ बेंगलुरू के शिवाजीनगर क्षेत्र में अपना बचपन व्यतीत किया था । उस समय के मैसुरू शासकों ने उनके प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में इस क्षेत्र को ‘शिवाजीनगर’ नाम दिया ।
२. छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन आज भी लाखों युवकों के लिए प्रेरणास्रोत हैं । मेट्रो स्थानक को उनका नाम देने से भारत की परंपरा का भी गौरव होगा ।
३. सरकार को वोटबैंक की राजनीति के लिए इतिहास का विकृतिकरण नहीं करना चाहिए तथा जनता की भावनाओं, साथ ही छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान की रक्षा करनी चाहिए ।
स्थानीय लोगों का मत
शिवाजीनगर में कन्नड एवं मराठी समुदाय की जनसंख्या अधिक है । स्थानीय एवं शहर के लोगों की दृष्टि से छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से मेट्रो का स्थानक होना गर्व की बात है । मेट्रो स्थानक को ‘सेंट मेरी’ नाम देने से यात्रियों में भ्रम की स्थिति होगी, साथ ही स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत होंगी ।
संपादकीय भूमिकाकांग्रेस को छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति पहले से ही विद्वेष होने से कर्नाटक की सरकार मेट्रो स्थानक को उनका नाम नहीं देगी, इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है । अब धर्मप्रेमी हिन्दुओं को ही सरकार पर दबाव बनाकर मेट्रो स्थानक को छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम देने के लिए बाध्य करना चाहिए ! |
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