Nepal Protest : पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के लिए कस्तूरी की आपूर्ति बंद होने के उपरांत से नेपाल कठिनाइयों का सामना कर रहा है !

नई दिल्ली – नेपाल में इस समय प्रचंड अस्थिरता है । युवाओं के नेतृत्व वाला आंदोलन इतना हिंसक हो गया कि प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को पद त्याग करना पडा । तीस से अधिक लोगों ने प्राण गंवाए, सरकारी भवन अग्नि को समर्पित कर दिए गए एवं काठमांडू में संचार बंदी लगा दी गई । इस घटना के कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें सामाजिक माध्यम पर प्रतिबंध भी सम्मिलित है; यद्यपि, ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के सेवकों का मानना है कि नेपाल से कस्तूरी की आपूर्ति बंद होने के कारण यह संकट उत्पन्न हुआ है ।

कस्तूरी क्या है एवं पुरी मंदिर में इसका महत्व क्यों है ?

कस्तूरी हिमालय के कैलाश क्षेत्र में मानसरोवर झील के समीप पाए जाने वाले कस्तूरी मृग की नाभि से प्राप्त एक दुर्लभ पदार्थ है । पुरी जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों के लिए इसका बहुत महत्व है । सेवक डॉ. शरत मोहंती के अनुसार, ‘इस कस्तूरी का उपयोग दैनिक एवं विशेष अनुष्ठानों में किया जाता है । इसका उपयोग विशेष रूप से ‘बनाक लागी’ नामक एक गुप्त अनुष्ठान में देवताओं का श्रृंगार करने के लिए किया जाता है । इसका उपयोग नीम की लकडी से बनी मूर्तियों को कीडों से सुरक्षित करने एवं भगवान के मुखमंडल को तेजोमय करने के लिए भी किया जाता है । ‘ इसके अभाव में पूजा अधूरी है एवं परंपराओं का ह्रास होता है।

नेपाल एवं पुरी के प्राचीन आध्यात्मिक संबंध

नेपाल के राजा सूर्यवंशी वंश से हैं , इसके विपरीत पुरी राजा गजपति चंद्रवंशी वंश से हैं । दोनों राजवंशों का संबंध जगन्नाथ परंपरा से है । पूर्व में नेपाल के राजा नियमित रूप से पुरी को कस्तूरी भेजते थे । उन्हें भगवान जगन्नाथ के रत्न सिंहासन पर पूजा करने का विशेष अधिकार प्राप्त था । मुक्ति मंडप के पंडित संतोष कुमार दास कहते हैं, कि कस्तूरी इस पवित्र परंपरा का अभिन्न अंग है । जिस प्रकार भारत में पशुपतिनाथ मंदिर का केदारनाथ से आध्यात्मिक संबंध है, उसी प्रकार पुरी एवं नेपाल का भी है; यद्यपि , २००८ में नेपाल में राजशाही की समाप्ति एवं वन्य जीव कानूनों के बदलाव के उपरांत कस्तूरी की आपूर्ति बंद हो गई । अब मंदिर को घरेलू स्रोतों पर निर्भर रहना पडता है, जो महंगा एवं अल्प्रपभावी है । जगन्नाथ मंदिर प्रशासन का कहना है, कि नेपाली राजा ने ही कस्तूरी की आपूर्ति बंद किया था ।

कस्तूरी की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने का विश्वास

भक्तों का मानना है कि नेपाल में समस्याएँ कस्तूरी की आपूर्ति बंद होने के कारण उत्पन्न हो रही हैं । डॉ. मोहंती ने स्मरण कराया कि इससे पूर्व भी कस्तूरी की आपूर्ति बंद होने के उपरांत नेपाल में भूकंप जैसी आपदाएं आई थीं । ये घटनाएँ आपस में जुड़ी हुई हैं । भक्तों ने मंदिर प्रशासन एवं भारत सरकार से, कस्तूरी की आपूर्ति मुक्त करने के लिए प्रयास करने का आवाहन किया है । उन्होंने पशुपतिनाथ एवं केदारनाथ के बीच के संबंध का उदाहरण दिया । भक्तों के अनुसार, कस्तूरी की अल्प उपलब्धता न केवल पूजा-अर्चना को प्रभावित करती है, अपितु नेपाल एवं पुरी के मध्य प्राचीन आध्यात्मिक संबंधों को भी निर्बल करती है ।

संपादकीय भूमिका

यदि बुद्धिजीवी इसकी आलोचना करके अपने हिन्दुद्वेष की अग्नि का शमन करने का प्रयत्न करें तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा !