सर्वत्र के साधकों को सूचना !
२२.९.२०२५ से आरंभ हो रहे नवरात्रोत्सव की अवधि में सर्वत्र बडे स्तर पर देवी की उपासना की जाती है । सनातन संस्था ने देवी के विषय में अध्यात्मशास्त्रीय ज्ञान देनेवाले ग्रंथ, लघुग्रंथ, साथ ही देवीतत्त्व की अनुभूति करानेवाले चित्रों एवं नामजप-पट्टियों की निर्मिति की है । नवरात्रि के कारण देवीभक्त शास्त्रोक्त पद्धति से देवी की आराधना कर सकें तथा उससे भक्तों को देवीतत्त्व का अधिक से अधिक लाभ हो, इस दृष्टि से इन ग्रंथों एवं उत्पादों को समाज तक पहुंचाना आवश्यक है ।

१. देवी से संबंधित ग्रंथ एवं लघुग्रंथ
१ अ. ‘शक्ति’ की उपासना कैसे करनी चाहिए ?
इस विषय में जानकारी देनेवाले २ ग्रंथ – ‘शक्ति का प्रस्तावनात्मक विवेचन’ एवं ‘शक्ति की उपासना’ ! : इन २ ग्रंथों में शक्ति के विभिन्न नाम, उसके प्रकार एवं कार्य, देवी की उपासना की विशेषताएं, साथ ही मूर्तिविज्ञान विशद किया है । इसके साथ ही ‘कौनसी रंगोलियां बनाने पर शक्तितत्त्व आकृष्ट होता है ? काल के अनुसार किस देवी की उपासना करनी चाहिए तथा वह कैसे करनी चाहिए ? नवरात्रोत्सव कैसे मनाना चाहिए ?’, इसके विषय में अमूल्य जानकारी भी दी है । (इस विषय पर लघुग्रंथ भी उपलब्ध है ।)
१ आ. देवी-उपासना के विषय में ज्ञान देनेवाला लघुग्रंथ
‘देवीपूजन का अध्यात्मशास्त्र’ : इस लघुग्रंथ में ‘नवरात्रि में घटस्थापना कैसे करें ? दशहरे के दिन अपराजितादेवी का पूजन क्यों करना चाहिए ? देवी की मूर्ति पर ‘कुमकुमार्चन क्यों किया जाता है ?’ आदि संबंधी विस्तृत जानकारी दी है ।
२. सनातन के अन्य सात्त्विक उत्पाद
२ अ. शक्तितत्त्व से युक्त चित्र
सनातन-निर्मित श्री दुर्गादेवी के सात्त्विक चित्र में देवी का तत्त्व ३०.५ प्रतिशत आकृष्ट हुआ है । (कलियुग में किसी मूर्ति अथवा चित्र में औसतन ३० प्रतिशत तक ही देवता का तत्त्व आ सकता है । अन्यत्र उपलब्ध देवता के चित्र में यह तत्त्व औसतन २ – ३ प्रतिशत ही होता है ।) यह चित्र छोटा, मध्यम एवं बडा, इन आकारों में उपलब्ध है ।
२ आ. पदक
‘शिव-दुर्गा’ एवं ‘श्रीकृष्ण-लक्ष्मी’, इन देवताओं के चित्र अंकित पदक (लॉकेट) भी उपलब्ध हैं ।
२ इ. नामजप-पट्टियां
अक्षर सात्त्विक हों, तो उसमें चैतन्य होता है । सात्त्विक अक्षर तथा उनके चारों ओर देवता के तत्त्व के अनुरूप चौखट का अध्ययन कर सनातन ने विभिन्न देवताओं की नामजप-पट्टियां तैयार की हैं ।’ (२०.८.२०२५)
उक्त ग्रंथों के साथ निम्नांकित ग्रंथों एवं लघुग्रंथों का भी वितरण किया जा सकता है !१. ग्रंथ अ. त्योहार मनाने की उचित पद्धतियां एवं अध्यात्मशास्त्र आ. धार्मिक उत्सव एवं व्रतों का अध्यात्मशास्त्रीय आधार इ. अलंकारों का महत्त्व ई. स्त्री-पुरुषों के अलंकार उ. मांगटीके से कर्णाभूषण तक के अलंकार (अलंकार के विषय में शास्त्र एवं सूक्ष्म के प्रयोग !) २. लघुग्रंथ अ. आरती उतारने की शास्त्रोक्त पद्धति आ. सात्त्विक रंगोलियां देवताओं की उपासना भक्तिभाव से करें ! |
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संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
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