(और इनकी सुनिए …) ‘हिन्दुओं को धर्मनिरपेक्षता क्या है, यह समझाने की अधिक आवश्यकता है ! ‘ – Abdul Bari Siddiqui

राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी का निराधार वक्तव्य

अब्दुल बारी सिद्दीकी

पाटलिपुत्र (बिहार) – धर्मनिरपेक्षता क्या है, समाजवाद क्या है, संविधान क्या है, हमारे पूर्वजों का इतिहास क्या है ?, हिन्दू भाइयों को इसके संबंध में और अधिक जागरूक करने की आवश्यकता है, ऐसा राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने एक भाषण में कहा । इसके उपरांत उनकी तीव्र आलोचना होने लगी है । इस आलोचना पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने पुनः एक आपत्तिजनक वक्तव्य दिया । उन्होंने कहा कि इन दिनों एक संगठन द्वारा हमारे हिंदू भाइयों को उन्मादी बनाने का प्रयत्न किया जा रहा है । इसके उपरांत भा.ज.पा. की ओर से उनकी आलोचना होने लगी है ।

अपना स्पष्टीकरण देते हुए सिद्दीकी ने कहा कि मेरे वक्तव्य को अयोग्य पद्धति से समझा गया है । सभी धर्मों के लोगों के साथ मिलकर देश को सशक्त करना उनका उत्तरदायित्व है । संविधान में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक का उल्लेख है । अल्पसंख्यक कई प्रकार से पिछडे हुए हैं; फलस्वरूप सरकार उन्हें कुछ सुविधाएं देती है । (अल्पसंख्यक पिछडे हैं, इसका कारण उनकी धार्मिक कट्टरता है । सरकार चाहे जितनी भी सुविधाएं दे, उन पर कोई प्रभाव नहीं पडेगा ! – संपादक) बहुसंख्यक बडे भाई हैं । उनके हाथ में सत्ता है, फलस्वरूप वे समाज को एकजुट कर सकते हैं । अब एक ही दल लगातार हिन्दू-मुस्लिम का नारा लगा रहा है । मेरी आलोचना उस पर है, किसी धर्म या जाति पर नहीं । (देश में कुछ इस्लामी राजनीतिक दल हैं । वे धार्मिक घृणा व द्वेश प्रसारित रहे हैं । सिद्दीकी इस पर मुंह क्यों नहीं खोलते ? – संपादक)

हिन्दुओं को धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढाने की आवश्यकता नहीं है ! – भा.ज.पा.

दानिश इक्बाल

भा.ज.पा. नेता दानिश इकबाल ने सिद्दीकी के वक्तव्य की आलोचना की । उन्होंने कहा कि सिद्दीकी को भारतीय संस्कृति और परंपरा का कोई ज्ञान नहीं है, फलस्वरूप वे ऐसा कह रहे हैं । हिन्दुओं ने सदैव सब को अपनी संस्कृति में सम्मिलित किया है । हिन्दुओं को धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढाने की आवश्यकता नहीं है ।

बिहार के मंत्री और भा.ज.पा. नेता संजय सरावगी ने सिद्दीकी के स्पष्टीकरण की आलोचना करते हुए कहा कि क्षमा याचना मांगने के स्थान पर , सिद्दीकी हिन्दुओं को ‘विघटनकारी’ कह रहे हैं । वे मुसलमानों के नेता बनने का प्रयत्न कर रहे हैं, इसीलिए उनके मन की बात उनकी जिव्हा पर आ गई है । हम संविधान के अनुयायी हैं ।

संपादकीय भूमिका

  • इसे कहते हैं चोरी और सीनाजोरी ! इस देश में ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व में हिन्दुओं जैसा धर्मनिरपेक्ष कोई नहीं है । हिन्दू धर्मनिरपेक्ष हैं इसी के फलस्वरूप आज भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और मुसलमान यहां आनंद से रह रहे हैं । इसके विपरीत, यदि भारत में मुसलमान बहुसंख्यक हो गए, तो यह देश इस्लामी हो जाएगा और हिन्दुओं का नरसंहार होगा, जिस प्रकार से कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हुआ है और हो रहा है ! 
  • ऐसे वक्तव्यों को देखते हुए, भारत को शीघ्र से शीघ्र एक हिन्दू राष्ट्र बनाने और हिन्दुओं को सम्मान देने की आवश्यकता है !