भारत के वायुदल प्रमुख (एयर चीफ मार्शल) ए.पी. सिंह एवं सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय भारत द्वारा पाकिस्तान की जो धज्जियां उडाई गईं, उसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी दी । उसके उपरांत पाकिस्तान के ‘स्वघोषित’ फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने अमेरिका जाकर अप्रत्यक्ष रूप से भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दी । ‘पहलगाम के आक्रमण से आरंभ हुआ यह प्रकरण अभी तक रुकने का नाम नहीं ले रहा है । ‘अब इसका अंत पाकिस्तान के विनाश में होगा’, ऐसा यदि कहा जाए, तो यह अनुचित नहीं होगा । पाकिस्तान की मानसिकता देखी जाए, तो अब उसके दिन लद चुके हैं तथा उसका काल निकट आ चुका है । अमेरिका अब भारत के विरुद्ध पाकिस्तान का उपयोग कर रहा है; परंतु इसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान का विनाश होगा, यह उसे ध्यान में रखना होगा । दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के उपरांत ऐसा लग रहा था कि डॉनल्ड ट्रम्प भारत के साथ मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखेंगे; परंतु ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति हैं यह भूल गए हैं और वे उद्योगपति हैं, इसी मानसिकता से वे अमेरिका का कामकाज चला रहे हैं । उसके कारण अन्य देश नहीं, अपितु अमेरिकी विशेषज्ञ तथा उनके समर्थक भी यह कहने लगे हैं कि ‘ट्रम्प अमेरिका को डुबा रहे हैं ।’ एक ओर मुनीर कहते हैं, ‘हम यदि डूबने लगे, तो अन्यों को भी साथ लेकर डुबेंगे ।’, जबकि ट्रम्प भी वही कर रहे हैं । वे स्वयं भी डूबनेवाले हैं, साथ ही वे पाकिस्तान तथा अन्य देशों को लेकर डूब रहे हैं । इसे विधि का विधान कहना पडेगा । ट्रम्प जब पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तब कुछ ज्योतिषियों ने यह दावा किया था कि वे अमेरिका के अंतिम राष्ट्रपति सिद्ध होंगे । उसके उपरांत कोई भी व्यक्ति अमेरिका का राष्ट्रपति नहीं बन पाएगा । इसका दूसरा अर्थ यह है कि एक तो यह व्यवस्था नष्ट होगी अथवा अमेरिका नष्ट होगा । वर्तमान स्थिति देखकर ऐसा लग रहा है कि ट्रम्प के प्रथम कार्यकाल में यह भविष्यवाणी सत्य नहीं हुई; परंतु उनके दूसरे कार्यकाल में वह सत्य होने जा रही है । ट्रम्प ने अपने स्वार्थ के लिए जिस पाकिस्तान को पुनः गले लगा लिया है, उससे पाक के फील्ड मार्शल मुनीर शक्तिशाली अनुभव कर, परमाणुयुद्ध की धमकी दे रहे हैं । इस पर ट्रम्प अथवा उनके प्रशासन ने भले ही अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हो; परंतु वे मुनीर तथा पाकिस्तान को ही संरक्षण देंगे, इसमें कोई संदेह नहीं । मुनीर के इस वक्तव्य पर पाकिस्तानी नागरिकों की प्रतिक्रियाएं भी देखनी पडेंगी; क्योंकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के उपरांत पाकिस्तान की जनता पाकिस्तानी सेना की क्षमता को जान चुकी है तथा मुनीर, जो तानाशाही की ओर चल पडे हैं, पाकिस्तान की जनता उन्हें भी समझ चुकी है । वर्तमान समय में पाकिस्तान की स्थिति भिखारी जैसी है । पाकिस्तान के नागरिक देश छोड रहे हैं । वहां के राजनेता तथा सैन्य अधिकारियों ने पहले ही विदेशों में संपत्ति अर्जित कर रखी है । पाकिस्तान में कभी भी अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है तथा उस स्थिति में ये सभी लोग पाकिस्तान को छोडकर विदेश भागनेवाले हैं, यह बात पूरे पाकिस्तान को ज्ञात है । उसे ध्यान में लेकर ही मुनीर यह कह रहे हैं, ‘हमें किसी ने डुबाया, तो हम आधे विश्व को ले डूबेंगे !’
गांधी-नेहरू के ‘पाकिस्तान’ को मिटाने का यही है स्वर्णिम अवसर !
विश्व में जो कुछ आतंकवाद चलता है, उसमें कहीं न कहीं पाकिस्तानियों की संलिप्तता दिखाई देती है, इसका अर्थ पाकिस्तान पहले से ही आतंकवाद को बढावा देकर विश्व को डुबा ही रहा है । विगत ३५ वर्षों से भारत इसके परिणाम भुगत रहा है तथा यह संकट अभी भी समाप्त नहीं हुआ है । उसने कश्मीर को भारत से अलग-थलग कराने में सफलता प्राप्त की ही है । सीधे युद्ध में पाकिस्तान कभी भी भारत के सामने टिक नहीं सकता, यह ज्ञात होने से वह आतंकवाद के माध्यम से भारत के साथ छद्म युद्ध करता आया है । अब भारत इसे सहन नहीं करेगा, यह स्पष्ट होने के उपरांत वह भारत को डुबोने की भाषा बोल रहा है । वर्तमान समय में पाकिस्तान के पास १७० परमाणु बम हैं, जबकि भारत के पास १८० परमाणु बम हैं । पाकिस्तान ने कभी ऐसा कोई समझौता नहीं किया है कि ‘परमाणु बम’ का पहले उपयोग नहीं करेंगे अथवा स्वयं पर उसने यह बंधन नहीं डाल रखा है । इसलिए वह कभी भी परमाणु बम का उपयोग कर सकता है । भारत ने पहले स्वयं पर यह बंधन डाला था; परंतु अब उसने इसे हटा लिया है; इसलिए भारत पाकिस्तान को ‘जैसे को तैसा’ उत्तर देगा, यह निश्चित है ! पाकिस्तान ने भारत पर परमाणु बम गिराने का प्रयास किया, तो भारत की हवाई रक्षा प्रणाली उसे हवा में ही नष्ट कर सकती है, वर्तमान में भारत की इतनी क्षमता है । पाकिस्तान के पास ऐसी कोई रक्षा प्रणाली नहीं है । उसके कारण वह डूबेगा, इसके प्रति पाकिस्तानी नागरिकों के मन में संदेह नहीं होगा; परंतु इसमें भारत को भी हानि पहुंच सकती है, इसकी संभावना ध्यान में रखनी होगी । ‘पाकिस्तान केवल भारत पर परमाणु बम ही गिराएगा’, ऐसा कहा नहीं जा सकता । मुनीर ने कहा, ‘हम आधे विश्व को डुबा देंगे ।’ इसका अर्थ पाकिस्तान के पास जो परमाणु बम है, वह इरान अथवा अन्य इस्लामी देशों को दे सकता है । स्वाभाविक ही ये देश इजरायल के विरुद्ध परमाणु बम का उपयोग करेंगे तथा उसके उपरांत इजरायल इन देशों पर परमाणु बम गिराकर उन्हें नष्ट करेगा । इसमें मध्य-पूर्व के देश तथा खाडी देशों का अटल विनाश होगा । इस पर विचार किया जाए, तो भारत एवं इजरायल को मिलकर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के ठिकानों को नष्ट करना आवश्यक हो जाता है; परंतु ट्रम्प ऐसा करने की अभी तो अनुमति नहीं देंगे, यह भी स्पष्ट है । ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय में जब भारत पाकिस्तान पर विजय प्राप्त करने की स्थिति में था, उस समय ट्रम्प द्वारा बीच में ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोका जाना भारतीयों को अनुचित लगा । ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने के पीछे भारत द्वारा किए आक्रमण से पाकिस्तान के परमाणु केंद्र में रिसाव होने का दावा किया जा रहा है तथा इसके कारण ही अमेरिका द्वारा मध्यस्थता करते हुए भारत को युद्धविराम करने के लिए बाध्य किए जाने की भी बात कही जा रही है । अतः ‘ट्रम्प ने ऐसा करने को मना किया, तो ऐसे में प्रश्न उठता है, क्या इजरायल अमेरिका की बात मानने से स्वयं को रोक पाएगा ?’ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू तथा भारत के प्रधानमंत्री मोदी के मध्य मित्रता तथा इजरायल की रक्षानीति को देखा जाए, तो नेतान्याहू ऐसा निर्णय लेने की स्थिति में होंगे’, ऐसी अपेक्षा रखना अनुचित नहीं है । जनता दल के कार्यकाल में इजरायल ने पाकिस्तान के परमाणु अड्डों को नष्ट करने के लिए भारत से सहायता मांगी थी; परंतु हमारी तत्कालीन सरकार ने उसकी अनुमति नहीं दी । इसके परिणामस्वरूप ही वर्तमान में पाकिस्तान भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दे रहा है । भारत के तथा इजरायल के नागरिकों को ऐसा लगता है कि मुनीर के इस वक्तव्य से भारत को ४५ वर्ष पूर्व की गई चूक को सुधारने का अवसर मिला है तथा भारत को इस अवसर का लाभ उठाना आवश्यक है । नेतान्याहू ने ट्रम्प के कहने के विरुद्ध जाकर भी कुछ काम किए हैं तथा भारत वर्तमान में आयात शुल्क के विषय पर ट्रम्प का विरोध कर ही रहा है । इसे देखते हुए मुनीर द्वारा विश्व को डुबोए जाने से पूर्व उसे ही डुबा देना विश्व के लिए हितकारी है । उसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को पहल करनी चाहिए । यहां अंतरराष्ट्रीय दबाव का विचार करने के स्थान पर भारत की सुरक्षा का विचार होना आवश्यक है । प्रधानमंत्री मोदी ने यदि ऐसा किया, तो केवल भारत के ही नहीं, अपितु विश्व के इतिहास में प्रधानमंत्री मोदी का नाम अमर हो जाएगा । नेहरू एवं गांधी द्वारा बनाए ‘पाकिस्तान’ को नष्ट करने का यह स्वर्णिम अवसर है ।
| ‘हम यदि डूबने लगे, तो अन्यों को भी डुबा सकते हैं’, पाकिस्तान का यह दावा कितना हास्यजनक है, अब इसे प्रत्यक्ष दिखाने का समय आ चुका है ! |


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