Monsoon Session : संसद के वर्षा ऋतु अधिवेशन में २४० घंटे में से १५६ घंटे का समय व्यर्थ

  • जनता के २०४ करोड रुपयों की हानि ।

  • लोकसभा में १२० में से केवल ३७, राज्यसभा में १२० में से केवल ४७ घंटे कार्य हुआ ।

नई दिल्ली – संसद के वर्षा ऋतु अधिवेशन के कालावधि में लोकसभा का १२० घंटे कार्य होना अपेक्षित था, परंतु सदस्यों ने शोरगुल करने से केवल ३७ घंटे काम हुआ । इस अधिवेशन में लोकसभा के ८३ घंटे कार्य का समय व्यर्थ गया और केवल ३१ प्रतिशत काम हुआ । राज्यसभा में भी १२० घंटे का कार्य होना अपेक्षित था परंतु शोरगुल से केवल ४७ घंटे कार्य हुआ । सांसदों द्वारा किए गए शोरगुल से राज्यसभा का ६२ प्रतिशत समय व्यर्थ गया । लोकसभा और राज्यसभा का समय व्यर्थ जाने से जनता के २०४ करोड रुपये व्यर्थ गए हैं ।

१. २४ जुलाई एवं १ अगस्त को लोकसभा का कार्य केवल १२ मिनट चला,२३ जुलाई को कार्य १८ मिनट चला । ४ अगस्त को लोकसभा का कार्य २४ मिनट में स्थगित करना पड़ा ।

२. संसद का वर्षा ऋतु अधिवेशन २१ दिन चला । इन २१ दिनों में लोकसभा १ घंटा या उससे अधिक समय केवल ५ दिन चली ।

३. भारत की पहली लोकसभा का कार्य १४ सत्रों में हुआ था । इन १४ सत्रों में कार्य ३ सहस्र ७८४ घंटे चला । वर्ष १९७४ तक प्रत्येक लोकसभा के सत्रों में निरंतर बैठकों की संख्या १०० से अधिक थी ।

४. वर्ष १९७४ के बाद और वर्ष २०११ तक केवल ५ बार सदन की बैठकों की संख्या १०० से अधिक थी ।

५. पहली लोकसभा में ३३३ विधेयक सहमत हुए । १७ वी लोकसभा में अर्थात पिछली लोकसभा में वर्ष २०१९ से वर्ष २०२४ के कालावधि में २२२ विधेयक सहमतहुए । इस समय जनता के लिए महत्वपूर्ण विधेयक संसद में शोरगुल होते हुए भी विपक्ष की चर्चा बिना सहमत हुए ।

संपादकीय भूमिका 

  • भारत जब ७९ वा स्वतंत्रता दिवस मना रहा है तब संसद का कार्य पूरे २४० घंटे भी न चलना लज्जास्पद है । इससे जो जनता के पैसों का अपव्यय हुआ है, वह कार्य न होने देने वाले सांसदों की जेब से वसूलना जनता को अपेक्षित है। इसके लिए उनको वेतन और भत्ते देना बंद करना चाहिए । इसके लिए अब जनता द्वारा दबाव बनाना आवश्यक हो गया है ।
  • प्रत्येक सांसद को प्रतिमाह १ लाख २४ सहस्र वेतन मिलता है । इसके साथ सहस्रों रुपयों के विभिन्न भत्ते मिलते हैं । जनता की जेब से यह पैसा सांसदों को दिया जाता है और वे संसद में जनता की समस्याओं का समाधान करने के स्थान पर शोरगुल करके संसद का कार्य बंद कर देते हैं, तो ऐसे जनताद्रोही सांसदों की सदस्यता रद्द कर उन्हें कठोर दंड देना आवश्यक है ।