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नई दिल्ली – संसद के वर्षा ऋतु अधिवेशन के कालावधि में लोकसभा का १२० घंटे कार्य होना अपेक्षित था, परंतु सदस्यों ने शोरगुल करने से केवल ३७ घंटे काम हुआ । इस अधिवेशन में लोकसभा के ८३ घंटे कार्य का समय व्यर्थ गया और केवल ३१ प्रतिशत काम हुआ । राज्यसभा में भी १२० घंटे का कार्य होना अपेक्षित था परंतु शोरगुल से केवल ४७ घंटे कार्य हुआ । सांसदों द्वारा किए गए शोरगुल से राज्यसभा का ६२ प्रतिशत समय व्यर्थ गया । लोकसभा और राज्यसभा का समय व्यर्थ जाने से जनता के २०४ करोड रुपये व्यर्थ गए हैं ।
१. २४ जुलाई एवं १ अगस्त को लोकसभा का कार्य केवल १२ मिनट चला,२३ जुलाई को कार्य १८ मिनट चला । ४ अगस्त को लोकसभा का कार्य २४ मिनट में स्थगित करना पड़ा ।
२. संसद का वर्षा ऋतु अधिवेशन २१ दिन चला । इन २१ दिनों में लोकसभा १ घंटा या उससे अधिक समय केवल ५ दिन चली ।
३. भारत की पहली लोकसभा का कार्य १४ सत्रों में हुआ था । इन १४ सत्रों में कार्य ३ सहस्र ७८४ घंटे चला । वर्ष १९७४ तक प्रत्येक लोकसभा के सत्रों में निरंतर बैठकों की संख्या १०० से अधिक थी ।
४. वर्ष १९७४ के बाद और वर्ष २०११ तक केवल ५ बार सदन की बैठकों की संख्या १०० से अधिक थी ।
५. पहली लोकसभा में ३३३ विधेयक सहमत हुए । १७ वी लोकसभा में अर्थात पिछली लोकसभा में वर्ष २०१९ से वर्ष २०२४ के कालावधि में २२२ विधेयक सहमतहुए । इस समय जनता के लिए महत्वपूर्ण विधेयक संसद में शोरगुल होते हुए भी विपक्ष की चर्चा बिना सहमत हुए ।
संपादकीय भूमिका
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