१ ‘ब्लूटूथ इयरबड्स’, ‘हेडसेट’ अथवा ‘वायर्ड इयरफोन’ जैसे उपकरणों का उपयोग कर चल- दूरभाष का उपयोग करने से गर्दन से संबंधित कष्ट टालना संभव
हम चल-दूरभाष को हाथ में पकडे बिना ‘ब्लूटूथ इयरबड्स’, ‘हेडसेट’ अथवा ‘वायर्ड इयरफोन’, इन उपकरणों की सहायता से उसका उपयोग कर सकते हैं । इसके कारण हमें गर्दन मोडने की आवश्यकता नहीं पडती तथा चल-दूरभाष को हाथ में पकडने की भी आवश्यकता नहीं रहती । इस प्रकार हम गर्दन एवं कंधों की बीमारियों को टाल सकते हैं ।

२. रात की नींद पूरी न होने के परिणाम
‘कुछ लोग रात में लंबे समय तक चल-दूरभाष देखते हैं । इससे रात की नींद पूरी न होने से शरीर में पित्त तैयार होता है । पित्त से शरीर में गर्मी उत्पन्न होकर बाल झडना, पेट साफ न होना, वायु बनना आदि कष्ट होते हैं । नींद पूरी न होने के कारण दूसरे दिन काम में ध्यान नहीं लगता, साथ ही चिडचिडाहट बढती है ।
३. अंधेरे में चल-दूरभाष देखने से आंखों पर होनेवाले परिणाम
अंधेरे में चल-दूरभाष देखने से आंखों पर तनाव आता है तथा आंखों से पानी आता है, साथ ही चश्मा लगना अथवा चश्मे का क्रमांक बढना इत्यादि कष्ट हो सकते हैं ।
४. हाथ एवं कंधे पर होनेवाले परिणाम
रात में लंबे समय तक चल-दूरभाष हाथ में लेकर उसे देखते रहने से हाथ एवं कंधे पर तनाव आकर सूजन आती है तथा पीडा होने लगती है ।’
– डॉ. दीपक जोशी (बैचलर ऑफ नैचरोपैथी एवं योगिक साइंस) देवद, पनवेल. (१८.२.२०२५)

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?