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सोलापुर – महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने वारकरियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु श्रीक्षेत्र पंढरपुर में पूर येथे ‘पंढरपुर विकास प्रारूप’ प्रस्तावित किया था । इसे ‘कॉरिडॉर’ (प्रशस्त मार्ग) यह नाम भी दिया गया; परंतु इसमें अनेक त्रुटियां हैं तथा यह प्रस्ताव वारकरी संप्रदाय के मान्यवरों द्वारा की गई सूचनाओं को बाजू में रखकर किया गया है । इसके साथ ही वारकरियों की समस्याएं भिन्न हैं तथा उसके उत्तर भी भिन्न हैं, यह भी इसमें दिखाई दे रहा है । अतः इसका अध्ययन करने हेतु सर्वमान्य ‘पंढरपुर विकास प्रारूप अध्ययन समिति’ का गठन किया जाए, इस मांग का ज्ञापन ‘श्री पंढरपुर तीर्थक्षेत्र बचाव कृति समिति’ एवं वारकरी संप्रदाय की ओर से सोलापुर के जिलाधिकारी कुमार विश्वास को प्रस्तुत किया गया ।
ज्ञापन के महत्त्वपूर्ण सूत्र !
१. सरकार से उत्तर ही नहीं मिला ? : वारकरी संप्रदाय ने सरकार को एक अच्छा ‘भूवैकुंठ विकास प्रारूप’ प्रस्तुत किया था, उसका क्या हुआ ?, इसका उत्तर सरकार से मिला ही नहीं ।
२. समिति में वारकरी संप्रदाय तथा पंढरपुर के नागरिकों का समावेश हो : वर्तमान ‘कॉरिडॉर’ में अनावश्यक भूसंपादन दिखाया गया है, उस पर बडा विवाद चल रहा है । अतः सरकार, वारकरी संप्रदाय तथा पंढरपुर के नागरिक इन सभी की सहमति से विकास प्रारूप तैयार करने हेतु वारकरी संप्रदाय के मान्यवर प्रतिनिधि, पंढरपुर के नागरिकों के प्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारियों से युक्त ‘पंढरपुर विकास प्रारूप अध्ययन समिति’ का गठन किया जाए तथा उस समिति के मार्गदर्शन में पंढरपुर विकास प्रारूप का पुर्नप्रस्तुतिकरण हो, तभी सभी संतुष्ट होंगे तथा पंढरपुर का विकास संभव होगा । इसके लिए इस समिति का तत्काल गठन होना आवश्यक है । हम सभी को ऐसा लगता है कि इस समिति के गठन से ही इस समस्या का समाधान हो सकता है ।

जिलाधिकारी के साथ हुई बैठक में वारकरी संप्रदाय द्वारा उठाए गए सूत्र !
१. वर्तमान प्रस्तावित विकास प्रारूप में दिए गए ध्वस्तीकरण का हम तीव्र विरोध करते हैं ।
२. नागरिकों के साथ पूर्व विधायक प्रशांत परिचारक ने ‘लोगों के घर गिराकर कॉरिडॉर बनाने के स्थान पर निश्चितरूप से क्या करना आवश्यक है ?’, इसकी सूचना करनेवाला पत्र तत्कालिन जिलाधिकारी को सौंपा था । उन सूचनाओं को स्वीकार क्यों नहीं किया गया ?
३. हम विकास का विरोध नहीं कर रहे हैं । हमारा केवल यह कहना है कि यह विकास पंढरपुर की प्रथा-परंपराओं का पालन कर तथा वारकरी संप्रदाय तथा पंढरपुर के नागरिकों के मार्गदर्शन में हो । वाराणसी एवं पंढरपुर की तुलना कर विकास प्रारूप नहीं बनाया जाना चाहिए ।
४. पंढरपुर की मूल रचना तथा संस्कृति को अक्षुण्ण रखकर विकास प्रारूप बनाया जाए ।
५. बचाव समिति के पदाधिकारियों ने बडवे, साथ ही उत्पात-सेवाधारी के साथ किया अन्याय तथा इससे पूर्व मंदिर परिसर के नागरिकों द्वारा दिया गया बलिदान आदि घटनाओं का स्मरण कराया ।
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