खाडी देशों से मिल रही आर्थिक सहायता

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) – उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नेपाल सीमा पर ७ जिलों में अवैध धार्मिक संरचनाओं के विरुद्ध अभियान आरंभ किया है । पिछले ६० दिनों में श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, पीलीभीत तथा लखीमपुर खीरी जिलों में २९८ से अधिक अवैध मस्जिदों, मदरसों, कब्रों एवं ईदगाह (नमाज पढने के लिए खाली जगह) का रिकार्ड पंजीकारण हुआ । उनमें से २२३ को नोटिस दिए गए तथा १९८ को सील कर दिया गया । १३० संरचनाएं पूरी तरह से गिरा दी गईं । यह कार्रवाई केवल अवैध निर्माण के विरुद्ध नहीं है, अपितु विदेशी आर्थिक सहायता, धर्मांतरण एवं जनसांख्यिकीय परिवर्तन की संभावनाओं के कारण की जा रही है । इन क्षेत्रों में मस्जिदों एवं मदरसों की संख्या तेजी से बढ रही है तथा संदिग्ध (संदेहास्पद) एवं जनसंख्या संतुलन में परिवर्तन सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं ।
१. आयकर विभाग तथा गृह मंत्रालय की रिपोर्ट ने उजागर किया कि नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक संरचनाएं बनाने के लिए दक्षिण भारत, विशेष रूप से तमिलनाडु राज्य एवं खाडी देशों से करोडों रुपयों की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है । एक प्रकरण में एक व्यक्ति के खाते में १२ करोड रुपए मिले । रिपोर्ट में अनुमानित १५० करोड रुपयों के संदेहास्पद आर्थिक सहायता का उल्लेख है, जिसका उपयोग मस्जिद, मदरसे, कब्रें बनाने तथा धर्मांतरण के लिए किया गया ।
२. वर्ष २०१८ से २०२१ की समयावधि में इन जिलों में मस्जिदों की संख्या ७३८ से बढकर १ सहस्र (हजार) जबकि मदरसों की संख्या ५०० से बढकर ६४५ हो गई । नेपाल में भी मुसलमानों की जनसंख्या २० वर्षों में दोगुनी हो गई है । उत्तराखंड के पिथौरागढ, चंपावत एवं उधमसिंहनगर जैसे सीमावर्ती जिले भी अब इस संकट से दूर नहीं हैं । इन सभी गतिविधियों को देखते हुए यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि, सीमावर्ती क्षेत्र में एक मुस्लिम पट्टी बनाने का प्रयास चल रहा है, जो बांग्लादेश से आरंभ होकर पाकिस्तान तक फैले बडे जाल का भाग हो सकता है ।
संपादकीय भूमिकासरकार ने कार्रवाई की वह अच्छा है; परंतु ऐसी मस्जिदें तथा मदरसों का निर्माण कैसे होता है ? पुलिस एवं प्रशासन क्या करते हैं ? इस पर शासकों को ध्यान देना आवश्यक हो गया है ! |
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