Malegaon Blast : मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण के सातों आरोपी १७ वर्ष उपरांत निर्दाेष मुक्त !

भगवा आतंकवाद का कांग्रेसी षड्यंत्र ध्वस्त !

मुंबई, ३१ जुलाई (संवाददाता) : मुंबई सत्र न्यायालय के विशेष एन्.आई.ए. न्यायालय ने मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण के सभी ७ आरोपियों को निर्दाेष मुक्त किया । न्यायालय के इस निर्णय से इस प्रकरण में हिन्दुत्वनिष्ठों को अकारण फंसाकर ‘भगवा आतंकवाद’का हौवा खडा करनेवाले कांग्रेस के षड्यंत्र का भंडाफोड हुआ है । इस प्रकरण में हिन्दुत्वनिष्ठों को अपराधी प्रमाणित करने के लिए अन्वेषण विभागों ने झूठे प्रमाण प्रस्तुत किए । साध्वी प्रज्ञासिंह सहित लेफ्टनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), शंकराचार्य स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ, अजय राहीरकर, समीर कुलकर्णी एवं सुधाकर चतुर्वेदी ये ७ लोग निर्दाेष मुक्त हुए । विलंब से ही सही; परंतु निर्दाेषत्व सिद्ध होने के कारण सभी आरोपियों ने संतोष व्यक्त किया ।

न्यायालय के निर्णय के निम्न महत्त्वपूर्ण सूत्र !

१. सुधाकर चतुर्वेदी के घर में ‘आर्.डी.एक्स.’ रखकर उन्हें इसमें फंसाने का षड्यंत्र रचा गया ।

२. लेफ्टनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, कश्मीर से आर्.डी.एक्स. ले आए, इसका कोई भी प्रमाण अन्वेषण विभाग प्रस्तुत नहीं कर पाए ।

३. घटनास्थल पर उपयोग किया गया दोपहिया वाहन साध्वी प्रज्ञासिंह की है, इसका कोई भी प्रमाण अन्वेषण विभाग प्रस्तुत नहीं कर पाए । केवल वाहन को क्रमांक है, यह नहीं चलता; अपितु दोपहिया वाहन का चैसिस (एंजिन का अंश) क्रमांक नहीं मिला है ।

४. बमविस्फोट कराने के लिए रेकी (घटना को अंजाम देने हेतु किया जानेवाला अवलोकन) की गई अथवा आरोपियों ने बैठकें की, इसका भी कोई प्रमाण नहीं मिला ।

५. सभी आरोपियों पर लगाई गई धारा ‘अनलॉफूल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट’ (गैरकानूनी कृत्य प्रतिबंधक कानून) अर्थात ‘यूएपीए’ अनुचित है ।

६. लेफ्टनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने यह विस्फोट के लिए ‘अभिनव भारत’ संगठन के पैसों का उपयोग किया, इसका कोई भी प्रमाण नहीं मिला ।

७. अन्वेषण विभाग ने घटना का पंचनामा ठीक से नहीं किया । केवल संदेह के आधार पर आरोपियों को दंडित नहीं किया जा सकता ।

‘मिडिया ट्रायल’के द्वारा कांग्रेस ने चलाया भगवा आतंकवाद का ‘फेक नैरेटिव’ !

मालेगांव बमविस्फोट के उपरांत आगे के कुछ वर्षाें तक राहुल गांधी, पी. चिंदबरम्. सुशीलकुमार शिंदे, शरद पवारसहित कांग्रेस एवं उसके गठबंधन के राजनीतिक दलों के अनेक नेताओं ने जानबूझकर बार-बार ‘भगवा आतंकवाद’ का उल्लेख किया । न्यायालय के द्वारा निर्णय देने से पूर्व ही , साथ ही अन्वेषण विभागों ने भी कोई भी ठोस प्रमाण न होते हुए भी तथा माध्यमों ने मालेगांव अभियोग के आरोपियों के विरुद्ध झूठी कहानियां रची ।

ऐसे आया न्यायालय का निर्णय !

मुंबई सत्र न्यायालय के ‘एन्.आई.ए.’के विशेष न्यायालय में सवेरे ११ बजे सुनवाई आरंभ हुई । इस समय सभी सातों आरोपी न्यायालय में उपस्थित थे । न्यायालय का कक्ष तथा बाहर की गली अधिवक्ताओं, पत्रकारों तथा पुलिसकर्मियों से भर गई थी । साध्वी प्रज्ञासिंह को अलग तथा अन्य ६ पुरुष आरोपियों को अलग बिठाया गया था । न्यायाधीश ए.के. कोलाटी ने ३० मिनट निर्णय का वाचन किया । ‘अब क्या निर्णय आएगा ?’, इस उत्सुकतावश न्यायालय में गंभीर शांति थी । न्यायाधीश द्वारा सभी आरोपियों को निर्दाेष प्रमाणित किए जाने के उपरांत न्यायालय में उत्साह का वातावरण तैयार हुआ । आरोपियों के अधिवक्ता जयप्रकाश मिश्रा, साथ ही साध्वी प्रज्ञासिंह, लेफ्टनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त) एवं श्री. समीर कुलकर्णी ने निर्णय के उपरांत न्यायाधीश के सामने अपनी भावनाएं व्यक्त की ।

कांग्रेस क्षमा मांगे ! – महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

इस प्रकरण में हिन्दुत्वनिष्ठों को फंसानेवाली कांग्रेस को क्षमा मांगनी चाहिए । कांग्रेस का भगवा आतंकवाद का अस्तित्व दिखाने का प्रयास असफल हुआ । भगवा आतंकवाद की कहानी असफल सिद्ध हुई । तत्कालिन सरकार की ओर से पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाया गया । ‘जहां सर्वत्र इस्लामी आतंकवाद उजागर हो रहा था, उसकी धार क्षीण करने हेतु भगवा आतंकवाद का नैरेटिव खडा करने का तत्कालिन कांग्रेस सरकार का षड्यंत्र था । वोटबैंक के लिए हिन्दू आतंकवाद की राजनीति की गई ।

आज के निर्णय के कारण भगवा आतंक बोलनेवालों के मुंह पर करारा तमाचा ! – एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री

एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री महाराष्ट्र

मैं न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत करता हूं । विलंब से ही क्यों न सही; परंतु न्याय मिला । आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता; परंतु कांग्रेस -राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकाल में तथा मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण के उपरांत उसे भगवा रंग देकर राजनीति की गई । आज के इस निर्णय से भगवा आतंकवाद बोलनेवालों के मुंह पर करारा तमाचा लगा है । आज के इस निर्णय से यह भी सिद्ध हुआ है कि हिन्दू कभी भी देशविघातक क्रिया-कलापों में संलिप्त नहीं होते । हम न्यायव्यवस्था पर विश्वास करते हैं ।

क्या है मालेगांव बमविस्फोट ?

२९ सितंबर २००८ को मालेगांव की एक मस्जिद के पास बमविस्फोट हुआ । इस प्रकरण में महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दल ने १२ लोगों को बंदी बनाया । वर्ष २०११ में यह प्रकरण राष्ट्रीय अन्वेषण विभाग को हस्तांतरित किया गया । इस विभाग ने इस प्रकरण में और २ लोगों को पकडा । इस प्रकार मालेगांव बमविस्फोट प्रकरण में कुल १४ आरोपियों को बंदी बनाया गया । उनमें साध्वी प्रज्ञासिंह, लेफ्टनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी, अजय राहिरकर, राकेश धावडे, शिवनारायण कलासंग्रा, जगदीश म्हात्रे, शंकराचार्य स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ, श्याम साहू, प्रवीण तकलकी एवं लोकेश शर्मा को बंदी बनाया गया, जबकि रामजी कलासंगरा एवं संदीप डांगे को फरार घोषित किया गया । बंदी बनाए गए १४ आरोपियों में से राकेश धावडे, शिवनारायण कलासंगरा, जगदीश म्हात्रे, शंकराचार्य स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ, श्याम साहू, प्रवीण तकलकी एवं लोकेश शर्मा प्रथमदृष्ट्या प्रमाण न होने से वर्ष २०१७ में उन्हें छोडा गया । उसके उपरांत अन्य आरोपियों को सशर्त जमानत पर छोडा गया । यह अभियोग विशेष न्यायालयों में १७ वर्षाें तक चला ।

संपादकीय भूमिका 

  • भगवा आतंकवाद का अस्तित्व स्थापित करने के दुराग्रह के चलते हिन्दुत्वनिष्ठों का अमानवीय उत्पीडन करनेवाले कांग्रेस के तत्कालिन नेता तथा पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाही होना आवश्यक है l 
  • १७ वर्ष उपरांत मिला न्याय अन्याय ही है न ?