२३ वर्ष के बडे अंतराल के उपरांत कुछ शर्ताें के साथ जीवित नाग पकडने की अनुमति !

बत्तीसशिराला में बडे उत्साह के साथ नागपंचमी मनाई गई !

महाराष्ट्र के बत्तीसशिराला में नागपंचमी के उपलक्ष्य में निकाली गई पालकी शोभायात्रा

बत्तीसशिराला (जिला सांगली, महाराष्ट्र) : विगत २४ वर्षाें से बत्तीसशिराला (जिला सांगली) में जीवित नागों की पूजा एवं प्रदर्शन पर प्रतिबंध था । यह प्रतिबंध अब कुछ मात्रा में शिथिल कर दिए गए हैं । पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय एवं वन्यजीव विभाग ने २१ आवेदकों को शैक्षणिक उद्देश्य से तथा जागृति हेतु कुछ शर्ताें के साथ नाग पकडने की अनुमति दी है । इसके कारण २९ जुलाई की नागपंचमी शिरालावासियों के लिए अत्यंत विशेषतापूर्ण तथा विशेष आनंददायक थधी । समाज में सांपों के संवर्धन के विषय में साथ ही पारंपरिक ज्ञान का प्रसारण होने हेतु यह अनुमति दी गई है ।

इस संदर्भ में भाजपा विधायक श्री. सत्यजित देशमुख ने कहा, ‘‘वर्ष २००२में न्यायालय ने शिराला में मनाई जानेवाली नागपंचमी पर प्रतिबंध लगा दिए हैं । यह प्रकरण न्यायप्रविष्ट है । इसके लिए अनेक न्यायालयीन लडाईयां हुईं; परंतु उसमें सफलता नहीं मिल रही थी । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शहा ने शिरालावासियों को नागपंचमी के त्योहार को पूर्ववैभव प्राप्त कर देने का आश्वासन दिया था, जिसे उन्होंने पूरा किया है । इस निर्णय में सभी को योगदान है ।’’ इस अवसर पर पूर्व सभापति हणमंत पाटिल, संपतराव देशमुख, भाजपा नेता रणजितसिंह नाईक, सम्राट शिंदेसहित अन्य मान्यवर उपस्थित थे ।

बडे हर्षाेल्लास के साथ पालकी शोभायात्रा तथा विभिन्न मंडलों की ओर से नागपंचमी मनाई गई !

शहर में नागपंचमी के उपलक्ष्य में बडे हर्षाेल्लास के साथ पालकी शोभायात्रा निकाली गई, साथ ही विभिन्न मंडलों की ओर से भी नागपंचमी मनाई गई । शोभायात्रश में ढोल-ताशों की गूंज थी ।

श्रद्धालुओं, हिन्दुत्वनिष्ठों, सामाजिक संस्थाएं, संगठन, विभिन्न नागप्रेमी मंडल तथा जनप्रतिनिधियों की संयुक्त लडाई को मिली सफलता !

विगत २३ वर्षाें से बत्तीसशिराला (जिला सांगली) में जीवंत नागों की पूजा एवं प्रदर्शन पर प्रतिबंध था । इस संदर्भ में वहां के स्थानीय ग्रामवासियों, श्रद्धालु, हिन्दुत्वनिष्ठ, सामाजिक संगठन, संस्थाएं, मंदिरें, मंदिरों के न्यासी, विभिन्न नागप्रेमी मंडल एवं जनप्रतिनिधियों ने आंदोलन, ज्ञापन प्रस्तुति तथा अनशन कर इसके विरुद्ध आवाज उठाई थी । इस संदर्भ में लोकसभा एवं विधानसभा में भी प्रश्न उपस्थित किया गया था । इस संदर्भ में सामाजिक माध्यमों, प्रसिद्धिमाध्यमोंसहित दैनिक ‘सनातन प्रभात’से भी आवाज उठाई गई थी, साथ ही हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति ने भी यह प्रतिबंध हटाने के लिए आवाज उठाई था । इस संयुक्त लडाई को सफलता मिली तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा वन्यजीव विभाग ने २१ आवेदकों को शैक्षणिक उद्देश्य तथा समाज में जागृति लोने हेतु नागों को पकडने की अनुमति दी है ।