राज्य सरकार ने हिन्दीभाषा की अनिवार्यता स्थगित की !

कक्षा ३ से १० तक संशोधित पाठ्यक्रम की घोषणा !

मुंबई – राज्य के विद्यालयीन शिक्षा विभाग ने कक्षा ३ से १० तक संशोधित पाठ्यक्रम की घोषणा की है, जिसमें त्रिभाषा सूत्र को समाप्त कर दिया गया है । इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार ने प्राथमिक शिक्षा में हिन्दी भाषा की अनिवार्यता स्थगित कर दी है ।

कुछ दिन पूर्व, महायुति सरकार ने विद्यालयीन शिक्षा में हिन्दी भाषा को अनिवार्य बनाने के लिए एक अध्यादेश निर्गमित किया था । इसका राज्य भर में व्यापक विरोध हुआ, जिसमें म.न.से. अध्यक्ष राज ठाकरे भी सम्मिलित थे । इसके उपरांत, सरकार ने एक और अध्यादेश पारित किया और हिन्दी के अतिरिक्त कुछ अन्य भाषाओं को भी सम्मिलित किया; किन्तु उसे भी व्यापक विरोध का सामना करना पडा । अंततः सरकार झुकी और त्रिभाषा सूत्र को समाप्त कर दिया । इसी पृष्ठभूमि में, अब एक नए पाठ्यक्रम की घोषणा की गई है । त्रिभाषा सूत्र पर आगामी निर्णय समिति के वृतांत के उपरांत होने की संभावना है ।

कक्षा ३ से १० तक के लिए सरकार के नए पाठ्यक्रम में दो भाषाएं, मराठी और अंग्रेजी, सम्मिलित हैं । राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने इस पाठ्यक्रम को अनुमति दे दी है । इसमें मराठी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, कला शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, शारीरिक शिक्षा और मूलभूत मूल्य शिक्षा सम्मिलित हैं । इस विवरण से हिन्दी को बाहर रखा गया है ।

त्रिभाषा सूत्र पर नरेंद्र जाधव समिति !

राज्य सरकार ने त्रिभाषा सूत्र पर विचार-विमर्श के लिए अर्थशास्त्री डॉ. नरेंद्र जाधव के नेतृत्व में एक समिति नियुक्त की है । यह आगामी तीन मास में सरकार को अपना वृतांत सौंपेगी; किन्तु मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ‘त्रिभाषा सूत्र लागू करने’ का मानस अपनाया है और यह भी कहा है कि ‘यह सूत्र पहली कक्षा से लागू होगा या पांचवी कक्षा से, इसका निर्णय समिति का वृतांत आने के उपरांत ही लिया जाएगा ।’

अब मैं विद्यालय बंद करूंगा, दुकानें नहीं ! – राज ठाकरे की चेतावनी

राज ठाकरे

इस पर राज ठाकरे ने कहा कि हम हिन्दी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने के निर्णय का विरोध करेंगे । यदि राज्य सरकार को आत्महत्या करनी है तो कर ले । ५ जुलाई के मोर्चे के आघात के कारण सरकार ने हिन्दी को अनिवार्य करने का निर्णय वापस ले लिया । महाराष्ट्र में पहली से पांचवीं कक्षा तक हिन्दी लागू करने का प्रयास करें । अब मैं विद्यालय बंद करूंगा, दुकानें नहीं । अन्य विद्यालयों में मराठी अनिवार्य की जानी चाहिए ।