Ezra Sargunam Road : ‘हिन्दू कोई धर्म नहीं है’, ‘जो ईसाई नहीं बनता, उसे रक्त आने तक मारो’ कहनेवाले पादरी के नाम पर सडक !

तमिलनाडु में द्रविड मुन्नेत्र कडगम (द्रविड प्रगति संघ) सरकार का हिन्दू-विरोध !


चेन्नई (तमिलनाडु) – यहां किलपौक क्षेत्र में ‘वाडेल्स रोड’ का नाम परिवर्तित कर ‘आर्चबिशप (वरिष्ठ पादरी) एज्रा सरगुनम् रोड’ कर दिया गया है । इस सडक के नामकरण का औपचारिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था । इस कार्यक्रम में द्रमुक के मंत्री के.एन. नेहरू, हिन्दू धार्मिक एवं धर्मार्थ ट्रस्ट मंत्री शेखरबाबू, चेन्नई की महापौर आर. प्रिया तथा द्रमुक के विधायक इनिगो इरुधइराज उपस्थित थे ।


इस नामकरण का जनता द्वारा विरोध भी किया गया । तमिलनाडु में भाजपा के अध्यक्ष एवं विधायक नैनार नागेंद्रन ने आर्चबिशप एज्रा के हिन्दू-विरोधी भाषणों के वीडियो ‘एक्स’ पर प्रसारित किए । उन्होंने कहा कि यह अत्यंत लज्जाजनक बात है कि द्रमुक सरकार ने ऐसे व्यक्ति के नाम पर सडक का नामकरण किया, जो हिन्दुओं के विरुद्ध विष उगलता था । मैंने प्रसारित किए गए वीडियो से ‘उसे हिन्दुओं के प्रति कितना द्वेष था ?’, यह स्पष्ट होता है । उसने सार्वजनिक रूप से हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा करने का आवाहन किया था ।

एज्रा सरगुनम् द्वारा किए गए हिन्दू धर्म विरोधी कथन

१. हिन्दू कोई धर्म नहीं है ।

२. जो हिन्दू धर्म को सच्चा ‘धर्म’ मानता है, उसे चुप कराना आवश्यक है । उसके लिए की जाने वाली हिंसा भी उचित है । (मोहनदास गांधी का अहिंसावाद हिन्दुओं के लिए था, जबकि अन्य धर्मीय अपने धर्म के लिए कुछ भी करने को तत्पर रहते हैं, यह ध्यान दें ! – संपादक)


३. जो ईसाई नहीं बनता, उसे दो बार मारो तथा रक्त आने तक मारो, ईश्वर उसे क्षमा करेगा । (पादरीयों को शांति की मूर्ति समझनेवालों को सबक ! ऐसे पादरीयों पर कभी फिल्म बनाई जाएगी क्या ? उन्हें ऐसे रूप में दिखाया जाएगा क्या ? – संपादक)

४. हरिद्वार के कुंभ मेले में मैंने हिन्दुओं को ईसाई साहित्य बांटा, इसलिए मुझे वहां से निकाल दिया गया; परंतु इससे मेरे अभियान को और प्रेरणा मिली । (हिन्दू सर्वधर्म समभाव रखने का प्रयास करते हैं, जबकि अन्य धर्मीय हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन करने के लिए प्रयत्नशील रहते हैं ! – संपादक)

५. यह राष्ट्र ईसाई है । २०० वर्ष पहले यहां हिन्दू नामक धर्म था ही नहीं । हिन्दू राजनीतिक उद्देश्य के लिए बनाया गया नकली संप्रदाय है । मुसलमान इसे कैसे सहन कर रहे हैं ?, यही समझ नहीं आता । (ढोंगी धर्मनिरपेक्षतावादी इस विषय पर मुंह नहीं खोलेंगे, यह ध्यान दें ! – संपादक)

कौन था एज्रा सरगुनम् ?

एज्रा सरगुनम् ‘इवेंजेलिकल चर्च ऑफ इंडिया’ का पूर्व प्रमुख था । उसने देशभर में चर्च स्थापना के लिए बडा प्रचार एक अभियान चलाया था । वर्ष २००५ तक २ हजार से अधिक चर्च स्थापित किए गए थे एवं वर्ष २०५६ तक १ लाख चर्च स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था । एज्रा ने अनेक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध एवं हिन्दुओं के विरुद्ध अत्यंत अपमानजनक वक्तव्य किए थे ।

वर्ष २०१८ में एक भाषण में उसने ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया’ नामक कट्टर इस्लामी दल को हिन्दुओं के विरुद्ध सार्वजनिक रूप से उकसाया था । उस समय धर्म परिवर्तन के विरुद्ध बोलनेवाले पट्टाली मक्कल कात्छ दल (सर्वहारा जनता दल) के कार्यकर्ता रामलिंगम् की हत्या हुई थी ।

संपादकीय भूमिका

  • ऐसा केवल भारत में तथा हिन्दुओं के संदर्भ में जन्म-हिन्दुओं द्वारा ही हो सकता है !
  • हिन्दू राष्ट्र की स्थापना कितनी आवश्यक है ?, इसका यह एक जीवंत (जीता-जागता) उदाहरण है !