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नई दिल्ली – सुप्रीम न्यायालय ने उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश राज्यों में कावड़ यात्रा मार्गों पर जलपानगृह, विश्रामगृह तथा भोजनालय संचालकों के लिए वैध पंजीकरण तथा परवाना दिखाना अनिवार्य करने वाले राज्य सरकारों के आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया । सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सरकारों के इस आदेश की कानूनी वैधता की जाँच नहीं की जाएगी । इसलिए, संबंधित सभी विश्रामगृह तथा दुकान संचालकों के लिए कानून द्वारा आवश्यक पंजीकरण तथा परवाना प्रमाण पत्र दिखाना अनिवार्य है । हम इस प्रकरण में विवाद में नहीं पड़ रहे हैं । यह याचिका बंद की जा रही है ।
🚨 Big Win for Devotee Safety & Religious Sentiments during Kawad Yatra!
🛑 Supreme Court rejects Communist-backed plea against UP & Uttarakhand Govts’ order making display of QR code mandatory at hotels/dhabas on the Yatra route.
Tight slap to fanatic elements running… pic.twitter.com/WFXTEhLXXH
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) July 22, 2025
क्या है प्रकरण ?
उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड सरकारों ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी खाद्य विक्रेताओं के लिए ‘क्यूआर कोड’ प्रदर्शित करना तथा उनकी प्रामाणिकता प्रमाणित करना अनिवार्य कर दिया था । कुछ साम्यवादी कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया तथा इसका सर्वोच्च न्यायालय में आवाहन दिया । न्यायालय ने उनकी याचिका को अस्वीकार किया तथा राज्य सरकारों के निर्णय को स्थिर रखा ।
संपादकीय भूमिकायह उन कट्टर मुसलमानों के मुँह पर थप्पड है जो अपनी पहचान छिपाकर तथा बिना पंजीकरण के विश्रामगृह तथा भोजनालय चलाकर हिंदुओं को धार्मिक रूप से धोखा दे रहे हैं तथा उनका समर्थन करने वालों के लिए भी ! अब उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ! |
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