Sanatan Sanstha GURUPOURNIMA : सनातन संस्था की ओर से देशभर में ७७ स्थानों पर ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !

मुंबई – गुरुपूर्णिमा का अर्थ है गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने एवं गुरुसेवा का संकल्प लेने का दिवस ! भारत की एक महान विशेषता है – गुरु-शिष्य परंपरा ! यह दैवी परंपरा केवल गुरु-शिष्य, अध्यात्म तथा मोक्ष तक सीमित नहीं है, अपितु विश्वकल्याण की ओर प्रवाहित है । गुरु-शिष्य परंपरा ने मात्र शिष्य के जीवन का ही कल्याण नहीं किया है, अपितु धर्मसंस्थापन एवं राष्ट्ररक्षण का कार्य भी किया है । यही उद्देश्य ध्यान में रखकर प्रतिवर्ष सनातन संस्था की ओर से गुरुपूर्णिमा महोत्सवों का आयोजन किया जाता है । गुरुपूर्णिमा के दिन गुरुतत्त्व एक सहस्त्र गुना अधिक कार्यरत होता है, इसलिए इस दिन महोत्सव के माध्यम से गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है । इसी क्रम में १० जुलाई को सनातन संस्था की ओर से देशभर में ७७ स्थानों पर ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ । इनमें मराठी भाषा में ६४ स्थानों पर, हिन्दी भाषा में ८ स्थानों पर, तमिल तथा मल्ल्यालम् भाषाओं में प्रत्येक में २ स्थानों पर तथा गुजराती भाषा में १ स्थान पर गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाया गया । इस अवसर पर साधक चैतन्य से सराबोर हो गए । गुरु की कृपा का अनुभव कर वे भावविभोर हो गए ।

कुछ स्थानों पर सनातन संस्था के मार्गदर्शनानुसार साधना करनेवाले गुणवान विद्यार्थी, साथ ही राष्ट्र तथा धर्म के लिए कार्यरत हिन्दुत्वनिष्ठ राष्ट्रप्रेमियों का सत्कार किया गया । सातारा में ब्रिगेडियर हेमंत महाजन (सेवानिवृत्त), कोल्हापुर में ‘असत्यमेव जयते’ ग्रंथ के लेखक श्री अभिजित जोग सहित विविध मान्यवरों ने मार्गदर्शन किया ।

महोत्सव की रूपरेखा

कार्यक्रम के आरंभ में श्री व्यासपूजन तथा प.पू. भक्तराज महाराज की प्रतिमा का पूजन किया गया । सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी का संदेश वाचन किया गया । ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद’ विषय पर प्रेरणादायी चलचित्र का प्रक्षेपण किया गया । इसके पश्चात सनातन संस्था के जिन साधकों की आध्यात्मिक उन्नति हुई उन्होंने अपनी अनुभूतियां बताईं । संस्था की ओर से ‘राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा हेतु साधना एवं युद्धकालीन राष्ट्रीय कर्तव्य’ इस विषय पर मार्गदर्शन हुआ । वर्तमान में प्रत्येक को कम से कम स्वरक्षा के लिए समर्थ होना चाहिए, इस हेतु से महोत्सव में स्वरक्षा का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया ।

विशेष

१. इस वर्ष के महोत्सव की विशेषता यह रही कि रामराज्य की स्थापना हेतु संकल्प एवं सामूहिक नामजप यज्ञ किया गया ।

२. महोत्सव में अनेक स्थानों पर शिवकालीन शस्त्रास्त्रों का दुर्लभ प्रदर्शन किया गया था । यह प्रदर्शन देखकर अनेक लोगों ने कहा, ‘‘इतिहास का पुनरावलोकन हो गया ।’’

विविध विषयों पर ग्रंथ एवं फलक प्रदर्शन

धर्म, अध्यात्म, साधना, बालसंस्कार, आचारधर्म, आयुर्वेद, प्राथमिक उपचार, स्वसंरक्षण, हिन्दू राष्ट्र आदि विषयों पर ग्रंथ एवं फलक का प्रदर्शन किया गया था ।

ऑनलाइन गुरुपूर्णिमा महोत्सव

देश-विदेश में स्थित सहस्रों श्रद्धालुओं हेतु मराठी, हिन्दी, गुजराती, तमिल तथा मल्ल्यालम् भाषाओं में ऑनलाइन गुरुपूर्णिमा महोत्सवों का आयोजन किया गया ।

हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से ६५ स्थानों पर गुरुपूर्णिमा महोत्सव उत्साहपूर्वक मनाया गया !

हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से देशभर में मराठी, हिन्दी, कन्नड एवं तेलुगु भाषाओं में ७७ स्थानों पर ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ अत्यंत उत्साह से संपन्न हुआ । इस अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति के साधक तथा जिज्ञासु संबंधित स्थानों पर बड़ी संख्या में उपस्थित थे ।

प्रत्येक को राष्ट्र तथा धर्मकार्य हेतु समर्पित होना आवश्यक ! – सनातन संस्था

विविध स्थानों पर संपन्न महोत्सवों में सनातन संस्था के वक्ताओं ने कहा,

‘‘भारत पर जो आक्रमण हो रहे हैं, वे केवल विस्तारवाद हेतु नहीं, अपितु हिन्दू धर्म का समूल नाश करने हेतु हो रहे हैं । पहलगाम में आतंकवादियों ने ‘देश’ नहीं, ‘धर्म’ पूछकर गोलियां चलाईं । अब तक के दंगों का इतिहास भी यही कहता है कि जहां भी धर्मान्धों का आतंक फैला, वहां उन्होंने हिन्दुओं तथा उनके श्रद्धास्थानों को लक्ष्य बनाया । आज हम युद्ध जैसी स्थिति में हैं । यह केवल सीमाओं पर चलनेवाला युद्ध न होकर, एक ‘धर्मयुद्ध’ ही है । प्राचीन काल से धर्म के पक्ष में खड़े रहनेवालों की संख्या और शस्त्रबल कम होने पर भी, विजय सदैव धर्म की ही हुई है; क्योंकि भगवान और गुरुतत्त्व का आशीर्वाद धर्म की रक्षा करनेवालों पर ही रहता है । आज भी गुरुतत्त्व सनातन धर्म की रक्षा तथा भारत के उत्कर्ष हेतु कार्यरत है । अतः प्रत्येक को राष्ट्र एवं धर्म की सेवा में स्वयं को समर्पित करना ही होगा ।’’

गुरुपूर्णिमा के अवसर पर सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी का श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी द्वारा औक्षण !

रामनाथी (गोवा): महर्षियों द्वारा नाड़ीपट्टी में किए गए उल्लेख के अनुसार, सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी ने गुरुपूर्णिमा के दिन, अर्थात १० जुलाई २०२५ को उनका औक्षण किया । इस औक्षण के समय सनातन पुरोहित पाठशाला के श्री अमर जोशी तथा श्री सिद्धेश करंदीकर ने वेदमंत्रों का पाठ किया ।