महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग ने खेद व्यक्त किया !
मुंबई, ४ जुलाई (समाचार) – राज्य में ‘सार्वजनिक सूचना अधिकारी’ एवं ‘न्यायालयीन पुनरावलोकन प्राधिकरण’ के पदों का काम कनिष्ठ कर्मचारियों को सौंपने का प्रमाण बढ रहा है । वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों को इस उत्तरदायित्व से बहुत दूर रखा जा रहा है । गत अवलोकन प्रतिवेदन में भी यह उजागर किया गया है एवं इस स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है । राज्य सूचना आयोग ने खेद व्यक्त किया है कि राज्य में सार्वजनिक प्राधिकरणों में भी सूचना आवेदनों एवं प्रथम पुनरावलोकन याचिका के प्रति उदासीनता है । महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग ने ३ जुलाई को विधानसभा में वर्ष २०२३ के लिए अपना १८वां वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया । यह स्वाभाविक है कि अपर्याप्त कर्मचारियों के साथ-साथ अपर्याप्त कार्यालय सुविधाएं प्रलंबित पुनरावलोकन याचिका के निपटारे को प्रभावित करेंगी, यद्यपि, राज्य सूचना आयोग ने इस बात पर भी खेद व्यक्त किया है, कि प्रथम न्यायालयीन पुनरावलोकन अधिकारियों के स्तर पर पुनरावलोकन याचिका का अभी भी संतोषजनक एवं पर्याप्त रूप से निपटारा नहीं किया जा रहा है ।
वर्ष २०२३ में राज्य में सूचना के अधिकार के अंतर्गत ८ लाख ६० सहस्त्र ६४१ आवेदन प्राप्त हुए । वर्ष २०२३ में कुल आवेदनों की संख्या ९ लाख ३१ सहस्त्र ८१४ थी, जिसमें गत प्रलंबित याचिकाएं ७१ सहस्त्र १७३ सम्मिलित थीं। इनमें से वर्ष २०२३ में ८ लाख ५५ सहस्त्र में से ६६१ आवेदनों का निपटारा किया गया । राज्य सूचना आयोग ने इस प्रतिवेदन में एक याचिका में एक से अधिक प्रकरणों पर जानकारी मांगने पर खेद भी जताया है ।
१३८ में से ९० पद रिक्त !
राज्य में सूचना आयोग के लिए राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्त के अतिरिक्त कुल १३८ पद स्वीकृत हैं; किन्तु इनमें से ९० पद रिक्त हैं । सूचना आयोग के केवल ४८ पद ही भरे गए हैं ।
संपादकीय भूमिकासूचना के अधिकार को अस्वीकार करने का अर्थ पारदर्शी शासन को नष्ट करना एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है ! |
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