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कैनबेरा (ऑस्ट्रेलिया) – यहां की लिज कैमरोन नामक एक लेखिका ने स्वयं के जीवन पर आधारित एक पुस्तक लिखी थी । उस पुस्तक का नाम है – ‘कल्ट ब्राइड : हाऊ आइ वॉज ब्रेनवॉश्ड – एंड हाऊ आइ ब्रोक फ्री’ (वधू प्रथा : मेरा मस्तिष्क कैसे भ्रमित किया गया और मैंने कैसे मुक्ति पाई ?) । इस पुस्तक पर आधारित वृत्तचित्र यहां के ‘चॅनल ७’ द्वारा निर्मित किया गया है । ‘द कल्ट नेक्स्ट डोर’ नामक यह वृत्तचित्र वर्ष २०११ में लिज के जीवन पर आधारित है,तथा इसके कारण यह विषय पुनः चर्चा में आया है ।
ईसाई पंथ के प्रभाव में गई १८ वर्षीया लिज की करूण कथा –

१. वर्ष २०११ में लिज कैमरोन की आयु १८ वर्ष थी । उसी समय वह ईसाई धर्म का प्रचार करने वाले एक पंथ के प्रभाव में आ गई ।
२. उस पंथ की ‘युजुन’ नामक एक महिला ने अत्यंत चतुराई से लिज को अपने वचनों में फंसाया । कैसे वह धीरे-धीरे उस पंथ में उलझती चली गई, यह उसे स्वयं भी ज्ञात नहीं हुआ । यहां तक कि उसने अपना घर छोड दिया और कैनबेरा नगर स्थित उस ईसाई पंथ को मानने वाली के साथ रहने लगी ।
३. आगे उसका ऐसा मानसिक भ्रम किया गया कि ‘३ महिलाओं पर लैंगिक अत्याचार करने वाला दक्षिण कोरिया का पादरी जोशुआ ही उसके लिए सर्वस्व है’, ऐसा उसे लगने लगा ।
४. उसे बताया गया कि ‘जोशुआ उससे प्रेम करता है’ । इससे उसे लगा कि ‘मैं एक विशेष वधू हूं’ और वह स्वयं को भाग्यशाली समझने लगी ।
५. आगे उसे दक्षिण कोरिया ले जाया गया । वहां पादरी जोशुआ ने उससे शारीरिक संबंध रखने की इच्छा प्रकट की । उस समय लिज को ऐसा लगा कि जोशुआ के साथ सब कुछ करना ‘पवित्र’ ही है । अतः उसने उससे शारीरिक संबंध भी बनाए ।
६. कालांतर में लिज का स्वास्थ्य बिगडने लगा । जनवरी २०१२ में उसे चिकित्सालय में भर्ती करना पडा । वहीं उसकी माता ने उससे भेंट की और उसे चर्च के प्रभाव से बाहर निकालकर घर ले गई । मनोवैज्ञानिकों की सहायता से लिज को समस्त सत्य का बोध हुआ तथा वह इस सम्पूर्ण जाल से बाहर आ सकी । तब उसे यह भी ज्ञात हुआ कि किस प्रकार योजना बनाकर उसे इस षड्यंत्र में फंसाया गया था । इस पर आधारित उसने अपनी पुस्तक भी लिखी ।
७. लिज का प्रकरण उजागर होने के पश्चात् वर्ष २०२३ में पादरी जोशुआ उर्फ ‘जंग म्युंग-सेओक’ को २३ वर्ष का कारावास दंड सुनाया गया । वह पहले से ही ३ महिलाओं पर बलात्कार और लैंगिक शोषण के प्रकरणों में दोषी ठहराया गया है ।
८. आज लिज कैनबेरा में अधिवक्ता के रूप में कार्य कर रही है तथा उसने मनोविज्ञान में भी उपाधि प्राप्त की है । वह धर्मांधों की षड्यंत्रकारी प्रवृत्तियों, एवं वे किस प्रकार लोगों का मानसिक भ्रम करते हैं, इस विषय में मार्गदर्शन भी देती है ।
९. उसके जीवन की घटनाओं पर आधारित ‘द कल्ट नेक्स्ट डोर’ नामक वृत्तचित्र निर्मित किया गया है ।
संपादकीय भूमिका
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