संविधान से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाएं । – Shivraj Singh Chouhan

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मांग

 

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) : आपातकाल के समय भारतीय संविधान में किए गए संशोधनों को समाप्त करने की आवश्यकता है। उस समय संविधान की प्रस्तावना में जोड़े गए ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को अब हटाने पर विचार किया जाना चाहिए, ऐसी मांग केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां की । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंचालक दत्तात्रेय होसबाळे ने पहले ही कहा था कि, “संविधान से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाए जाने चाहिए, क्योंकि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने जब संविधान बनाया था, तब इन शब्दों को प्रस्तावना में सम्मिलित नहीं किया गया था ।” जब श्री चौहान से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने उपरोक्त उत्तर दिया । श्री चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि, “धर्मनिरपेक्षता हमारी संस्कृति की मूल भावना नहीं है ।”

(और इनकी सुनिए) “संघ को संविधान नहीं, अपितु मनुस्मृति चाहिए ।” — सांसद राहुल गांधी

विपक्ष के नेता राहुल गांधी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरसंचालक होसबाळे के कथन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “संघ का असली चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है । उन्हें संविधान नहीं चाहिए, उन्हें मनुस्मृति चाहिए । क्योंकि संविधान समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय की बात करता है — इसलिए वे उसका विरोध करते हैं । संघ और भाजपा का असली उद्देश संविधान जैसी शक्तिशाली चीज को दलितों, पिछड़ों और गरीबों से छीनकर उन्हें दोबारा दास बनाना है ।”
(क्या राहुल गांधी जानबूझकर यह भूल गए हैं कि आपातकाल के करीब डेढ़ वर्षों में कांग्रेस ने जनता को लगभग दास ही बना दिया था ? – संपादक)

संपादकीय भूमिका

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान के ‘हिंदू कोड बिल’ को बनाते समय मनुस्मृति का संदर्भ लिया है, यह बात उन्होंने स्वयं अपनी पुस्तकों में स्पष्ट की है । जिन लोगों ने इसका अध्ययन नहीं किया है, वे ही इस प्रकार के हास्यास्पद बातें करते हैं — जैसे कि राहुल गांधी ।

“संविधान के प्रस्तावना में बदलाव करना संभव नहीं, फिर भी आपातकाल के समय उसमें परिवर्तन किया गया।” — उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की टिप्पणी

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

संविधान के प्रस्तावना में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रस्तावना पूरे संविधान का मूल बीज है, जिस पर यह पूरा लिखित कानून संबंधी जानकारी (दस्तावेज) खड़ी है । भारत के अतिरिक्त विश्व के किसी भी देश के संविधान के प्रस्तावना में अब तक कोई परिवर्तन नहीं किया गया है ।

संपादकीय भूमिका

यह शब्द हटाना केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए हिंदू समाज को अपेक्षा है कि यह कार्य केंद्र सरकार ही करे ।