
मुंबई – महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के (मनसे के) अध्यक्ष राज ठाकरे ने सरकार के द्वारा छात्रों के लिए हिन्दी भाषा अनिवार्य करने के निर्णय का तीव्र विरोध किया है । उन्होंने पत्रकार वार्ता कर कहा, ‘आप हमारे बच्चों पर अन्य प्रांत की भाषा क्यों थोप रहे हैं ? हम यह नीति सहन नहीं करेंगे । केंद्र में जब प्रधानमंत्री मोदी तथा गृहमंत्री अमित शाह गुजरात से हैं, तब भी गुजरात राज्यसहित अन्य राज्यों में हिन्दी भाषा अनिवार्य नहीं की गई है, तो महाराष्ट्र में ही ऐसा क्यों ? उत्तर के लोगों को सुसंस्कृत महाराष्ट्र राज्य पर अपना नियंत्रण स्थापित करना है । यदि आप हमारे राज्य में हमारी भाषा का सम्मान नहीं करेंगे, तो संघर्ष अटल है तथा सरकार ही इसके लिए पूर्ण रूप से उत्तरदायी होगी । महाराष्ट्र के विद्यालय बच्चों को हिन्दी भाषा कैसे सिखाते हैं ?’, यही हम देखेंगे ।’ उन्होंने यह चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को यदि यह चुनौती लगती हो, तो वह उसे चुनौती ही समझे ।
“… मुलांवर हिंदी भाषा लादण्याचा सरकारचा प्रयत्न आहे, जो हाणून पाडला पाहिजे. यांत एकतर मुलांचं नुकसान आहेच पण मराठी भाषेचं नुकसान आहे.
सरकार काय वरून जे सांगतील त्याच्या मागे घरंगळत जायला तयार आहे, पण तुम्ही बळी पडू नका. तशी गरजच नाही. आणि तुम्हाला सरकारकडून जबरदस्ती झाली तर… pic.twitter.com/v5xgQH4IIM
— MNS Adhikrut – मनसे अधिकृत (@mnsadhikrut) June 18, 2025
राज ठाकरे ने आगे कहा कि,
महाराष्ट्र में अन्य भाषाओं का सम्मान किया जाता है, उसी प्रकार से हमारी भाषा का भी सम्मान करना होगा । सरकार बच्चों पर हिन्दी भाषा थोपने का प्रयास करती हो, तो मनसे इसे सहन नहीं करेगी । यदि हिन्दी भाषा अनिवार्य नहीं है, तो सरकार हिन्दी पुस्तकें क्यों छाप रही है ? जो भाषा अनिवार्य नहीं है तथा जो भाषा उपयोगी भी नहीं है, ऐसी भाषा आप मत सिखाएं । छिपे पद्धति से भाषा सिखाने की सरकार की नीति का आप शिकार न बनें, अन्यथा हम इसे महाराष्ट्र द्रोह मानेंगे । उन्होंने यह प्रश्न भी उठाया कि क्या यह भारतीय प्रशासनिक सेवा के (आईएएस् के) अधिकारियों का दबाव तो नहीं है ?
गुजरात में गुजराती, अंग्रेजी तथा गणित विषय अनिवार्य !
राज ठाकरे ने यह भी कहा कि गुजरात सरकार की यह अधिसूचना है । वहां पहली कक्षा से गुजराती, गणित एवं अंग्रेजी भाषा अनिवार्य है । वहां हिन्दी भाषा अनिवार्य नहीं है, तो महाराष्ट्र में ही हिन्दी भाषा अनिवार्य क्यों ? मेरी यह पत्रकार वार्ता महाराष्ट्र के भाई-बहनों तथा विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए है । लेखक, साहित्यिक, कलाकार आदि से मेरा अनुरोध है कि आपको इस पर बोलना चाहिए; क्योंकि ये लोग मराठी को मिटा देंगे ।
क्या आप उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश तथा बिहार में तीसरी भाषा के रूप में मराठी भाषा सिखाएंगे ?
उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश एवं बिहार में आप तीसरी भाषा कौनसी सिखाएंगे ? क्या आप वहां मराठी भाषा सिखाएंगे ? गुजरात में हिन्दी भाषा अनिवार्य नहीं है । आज यदि इन्होंने हम पर हिन्दी भाषा थोप दी, तो उससे मराठी भाषा स्थाईरूप से कुचल दी जायेगी । आप-हम मराठी हैं; क्योंकि हम वह भाषा बोलते हैं । यदि इस भाषा का अस्तित्व ही नहीं रहा, तो हमारे मराठी होने का क्या अर्थ है ?
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