Assam CM Himanta Biswa Sarma : हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों के पास मस्जिदें बनाना सहन नहीं करेंगे !

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का ‍वक्तव्य

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा

गुवाहाटी (असम) – राज्य में हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों एवं परंपराओं के साथ छेडछाड सहन नहीं की जाएगी । यहां मस्जिदें बनाना सामाजिक सद्भाव को संकट में डाल सकता है, ऐसा कहते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मंदिरों के स्थान पर मस्जिदें बनाने का विरोध किया है ।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि ‘सत्र’ असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान के प्रतीक हैं । ये संस्थाएं श्रीमंत शंकरदेव द्वारा प्रारंभ किए गए एकशरण धर्म (नव-वैष्णव धर्म) से संबंधित हैं तथा उनका पूरे राज्य में सामाजिक प्रभाव है; परंतु वर्तमान में धुबरी और बारपेटा जैसे कुछ क्षेत्रों में सत्रों की भूमि पर अवैध नियंत्रण कर वहां मस्जिदें बनाने के प्रकरण सामने आए हैं, जिससे समुदायों में तनाव बढ सकता है । जब सत्र के पास मस्जिद बनाई जाती है तथा अजान की ध्वनि नामघर यानी सत्र के पास के प्रार्थना स्थल तक आती है अथवा सत्र के पास गोमांस पकाया जाता है, तब वह ‘नॉन-नेगोशिएबल पॉइंट’ (जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता) बन जाता है । यदि किसी भी स्थान पर संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होती है, तो बाहर के लोगों को वहां से पीछे हटना चाहिए । स्थिति को और बिगडने नहीं देना चाहिए । राज्य सरकार सभी ९२२ सत्रों को सक्षम नहीं कर सकती; इसलिए जनता से सत्रों की सुरक्षा करने और उनकी सांस्कृतिक भूमिका बनाए रखने में सहयोग करने का आह्वान किया जाता है ।

‘सत्र’ क्या है?

‘सत्र’ असम में स्थित वैष्णव मठ हैं, जो एकादशरण धर्म या नव-वैष्णव धर्म से संबंधित हैं । यह एक एकेश्वरवादी भक्ति आंदोलन है, जिसे १५वीं-१६वीं शताब्दी में संत-समाज सुधारक महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव ने प्रारंभ किया था । इन सत्रों की भूमि से संबंधित समस्याओं की समीक्षा करने के लिए स्थापित सत्र आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की है । इस आयोग ने अनुमान से १२६ सत्रों का निरीक्षण किया एवं वहां की समस्याओं का अध्ययन किया ।