नासिक (महाराष्ट्र) में वर्ष २०२७ में सिंहस्थ कुंभपर्व !

नासिक – नासिक एवं त्र्यंबकेश्वर में वर्ष २०२७ में ‘सिंहस्थ कुंभपर्व’ होनेवाला है । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में १३ अखाडों के प्रतिनिधियों, साथ ही नासिक एवं त्र्यंबकेश्वर के साधु-महंतों की १ जून को होनेवाली बैठक में इस कुंभपर्व में होनेवाले पर्वस्नान की तिथि की घोषणा की जाएगी ।
कुंभपर्व की तैयारी तथा नियोजन के लिए प्रशासन की ओर से अनेक बैठकें कर भी राजयोगी स्नान तथा पर्वस्नान की तिथियों की घोषणा नहीं हुई थी, उसके कारण साधु-महंतों ने अप्रसन्नता व्यक्त की थी । नासिक जिले के लिए अभी भी अभिभावक मंत्री की घोषणा न होने से राजयोगी स्नानों की तिथियां घोषित करने में विलंब होने की बात कही जा रही है ।
७५ वर्ष उपरांत त्रिखंड योग हुआ साकार !नासिक में प्रति १२ वर्ष उपरांत कुंभपर्व का आयोजन होता है । बृहस्पति जब सिंह राशि में आते हैं, उस समय नासिक का सिंहस्थ कुंभस्नान संपन्न होता है । ३१ अक्टूबर २०२६ को दोपहर १२.०२ बजे बृहस्पति का सिंह राशि में प्रवेश होगा । ध्वजारोहण के साथ कुंभपर्व का आरंभ होगा । उसके कारण अगस्त २०२७ में नासिक एवं त्र्यंबकेश्वर में पहला पर्व स्नान होगा । उसके १३ महिने उपरांत बृहस्पति के स्थान में परिवर्तन होकर भी कुंभपर्व समाप्त नहीं होगा; क्योंकि वर्ष २०२८ तक २ बार बृहस्पति वक्री होंगे । २४ जुलाई २०२८ को दोपहर ३.३६ बजे बृहस्पति अगली राशि में गोचर करेंगे । उसके कारण उस दिन ध्वजावतरण अर्थात कुंभपर्व की ध्वजा उतारी जाएगी । जिस प्रकार प्रयागराज में १४४ वर्ष उपरांत महाकुंभपर्व का संयोग साकार हुआ था, उस प्रकार से नासिक में लगभग ७५ वर्ष उपरांत त्रिखंड योग साकार हुआ है । अतः यह कुंभपर्व वर्ष २०२८ तक चलेगा । इस वर्ष २८ महिनों का कुंभ पर्वकाल है, उसमें अमृतपर्व काल के ४० से ४२ स्नान होंगे, ऐसा पुरोहित संघ ने बताया है । |
क्या है नासिक के कुंभपर्व का महत्त्व ?
भारत में प्रति ३ वर्ष में एक बार, इस पद्धति से १२ वर्षाें में नासिक (त्र्यंबकेश्वर), प्रयागराज, उज्जैन एवं हरिद्वार इन ४ विभिन्न तीर्थस्थलों पर संपूर्ण कुंभपर्व होता है । वर्ष १९५६ में इसी प्रकार का कुंभपर्व हुआ था । अतः इस कुंभपर्व का अनन्यसाधारण महत्त्व है । कुंभपर्व एक धार्मिक उत्सव है; इसलिए इसमें सहभागी होने हेतु किसी को औपचारिकरूप से निमंत्रण नहीं दिया जाता । ऐसा होते हुए भी करोडों श्रद्धालु इस पर्व में भाग लेते हैं । इस कुंभपर्व में राजयोगी स्नान का विशेष महत्त्व है । इस अवसर पर नदी में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देते हुए नदी का पूजन किया जाता है । इस अवसर पर विभिन्न अखाडों के साधु-महंत पारंपरिक वाद्यों से युक्त शोभायात्रा में गाजे-बाजे के साथ आकर नदी में राजयोगी स्नान करते हैं । इस पर्व में साधु-महंतों को ही सर्वप्रथम राजयोगी स्नान करने का सम्मान दिया जाता है । साधु-संतों द्वारा राजयोगी स्नान करने के उपरांत सामान्य श्रद्धालु नदी में स्नान करते हैं । व्यवस्थापन की दृष्टि से नासिक एवं त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभपर्व का आयोजन होता है, जबकि त्र्यंबकेश्वर में शैवभक्तों का स्नान होता है, ऐसी जानकारी नासिक पुरोहित संघ के समन्वयक श्री. प्रतीक शुक्ल ने दी ।
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