
पुणे – युद्ध हिंदी सिनेमा उद्योग की कोई रोमांटिक फिल्म नहीं है। युद्ध एक बहुत गंभीर प्रकरण है । युद्ध या हिंसा अंतिम उपाय होना चाहिए ; इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह युद्ध का समय नहीं है। पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे (सेवानिवृत्त) ने कहा है कि भले ही कुछ मूर्ख लोग हम पर युद्ध थोपें, हमें इसका जश्न नहीं मनाना चाहिए। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम पर सवाल उठाने वालों और पाकिस्तान के विरुद्ध पूर्ण युद्ध छेड़ने का सुझाव देने वालों की आलोचना की है। वह यहां ‘ इन्स्टिट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंट्स ऑफ इंडिया ‘ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, ” यदि मुझे आदेश मिलता तो मैं अवश्य युद्ध के मैदान में जाता ;” लेकिन मेरी प्राथमिकता इस मुद्दे को राजनीतिक बातचीत के द्वारा सुलझाना है। इस लड़ाई से सीमावर्ती परिसरों में रहने वाले लोग सदमे में हैं। बम विस्फोटों के कारण छोटे बच्चों को बंकरों में रात बितानी पड़ रही है। युद्ध में अपने प्रियजनों को खोने वालों का आघात अब पीढ़ियों तक बना रहेगा। ‘पीटीएसडी’ (‘पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर’) नामक स्थिति के कारण पीड़ितों में २० साल बाद भी भय और चिंता बनी रहती है। ऐसे लोगों को कई बार मनोचिकित्सकों की मदद लेने की ज़रूरत पड़ती है।
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