विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर का बयान
मुंबई – भारत कभी भी दूसरों को अपने निर्णयों पर वीटो का उपयोग करने की अनुमति नहीं देगा और डर की परवाह किए बिना राष्ट्रीय हित और वैश्विक कल्याण के लिए जो सही होगा वह करेगा, भारत के विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने यहां ऑनलाइन उपस्थित रहते हुए अपने विचार व्यक्त किये । कांची कामकोटि पीठ के ६८ वें शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती के नाम पर दिया जाने वाला यह पुरस्कार डॉ. जयशंकर द्वारा दिया गया। वे उस समय बात कर रहे थे ।
डॉ. जयशंकर ने कहा,
१. जैसे-जैसे भारत विश्व स्तर पर अधिक गहराई से जुड़ता जा रहा है, इसके निहितार्थ और अधिक गहरे होते जा रहे हैं। भारत की समृद्ध विरासत से दुनिया बहुत कुछ सीख सकती है। यह तभी संभव है जब भारतीयों को खुद पर गर्व हो। अगर भारत तटस्थ रहता है तो गलत मत समझिए । हम वही करेंगे जो राष्ट्रहित में होगा ।
२. बहुत लंबे समय से हमें सिखाया गया है कि ‘प्रगति का अर्थ है अपनी परंपराओं को अस्वीकार करना’; लेकिन अब लोकतंत्र के मजबूत होने से दुनिया देश को नए सिरे से जान रही है ।
३. भारत एक असाधारण राष्ट्र है; क्योंकि यह एक संस्कृति वाला देश है । अपनी सांस्कृतिक शक्ति का पूर्ण उपयोग करके ही यह वैश्विक प्रभाव डाल सकता है।
४. भारत आज एक महत्वपूर्ण मोड पर खड़ा है, जहां वह विकास के नए अवसर तलाश रहा है। हालांकि कुछ पुराने मुद्दे अभी भी बचे हुए हैं, जिनका समाधान होना जरूरी है।

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