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वाराणसी (उ.प्र.) – हिन्दूहित के उपक्रमों को गति प्रदान करने के लिए ‘हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ वाराणसी में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ । अधिवेशन में ‘हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति’ के माध्यम से हिन्दू राष्ट्र का जन आंदोलन खडा करने का संकल्प किया गया । अपने क्षेत्र में हिन्दू संगठनों को संपर्क करना, मंदिरों को संगठित करने के लिए मंदिर संपर्क अभियान करना एवं स्थानीय हिन्दू संगठन मजबूत करने की योजना बनाई गई । इस अधिवेशन में ‘भारत सेवाश्रम संघ’ के स्वामी ब्रह्ममयानंद, वाराणसी के ‘भारत माता मिशन’ पीठाधीश्वर स्वामी विवेक चैतन्य, बिहार के गरीबनाथ मंदिर के महंत विनय पाठक एवं हिन्दू जनजागृति समिति के धर्मप्रचारक सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी की वंदनीय उपस्थिती थी । साथ ही वाराणसी व्यापारी मंडल के श्री. अजित सिंह बग्गा, ‘प्राच्यम्’ ‘ओटीटी प्लेटफॉर्म’ के श्री. प्रवीण चतुर्वेदी भी उपस्थित थे । एंड्रॉइड सनातन पंचांग २०२५ का भी विमोचन अधिवेशन में किया गया । इस अधिवेशन में उत्तर प्रदेश, बिहार, मणिपुर, बंगाल, असम तथा नेपाल एवं ऑस्ट्रेलिया के ५० से अधिक संगठनों के पदाधिकारी, अधिवक्ता, संतजन, मंदिर न्यासी, उद्योगपति, पत्रकार एवं संपादक आदि २३० से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित थे ।
अधिवेशन में हिन्दुत्वनिष्ठों द्वारा किया गया मार्गदर्शन

१. आचार्य डॉ. कामेश्वर उपाध्याय, महासचिव, अखिल भारतीय विद्वत परिषद, वाराणसी – भारतवर्ष में सनातन धर्म की रक्षा के लिए बगलामुखी की पूजा, रुद्र और हवन तथा संपूर्ण वसुंधरा पर जहां आवश्यकता हो, वहां हवन कार्य आरंभ होना चाहिए । आचार्य अरविंद घोष ने कहा था कि वर्ष २०२० से भारतवर्ष संपूर्ण विश्व का नेतृत्व करेगा तथा १००० वर्षों तक उसका नेतृत्व कायम रहेगा, यह परमात्मा का आदेश है । यदि भारतवर्ष में सनातन राष्ट्र की स्थापना हुई, तो १५-२० हिन्दू राष्ट्र की स्थापना स्वमेव हो जाएगी, उसे कोई रोक नहीं पाएगा । हमें आज राष्ट्र निर्माण की दिशा में महर्षि वशिष्ठ की आवश्यकता है । हमें समझना होगा कि वह राष्ट्र, राष्ट्र नहीं हो सकता जहां राम न हों । जब तक इस देश में अग्निहोत्र नहीं होगा, तब तक कलि से रक्षा के लिए बल निर्माण नहीं होगा ।
२. श्री. शंकर खराल, केंद्रीय उपाध्यक्ष, विश्व हिन्दू महासंघ, नेपाल – नेपाल में राजतंत्र हटने के बाद से प्रजातंत्र को आधार बनाकर नेपाल में वामपंथियों द्वारा हिन्दुओं को बांटा जा रहा है । भारत से जुडे नेपाली क्षेत्रों में भारतीयों व नेपालियों के बीच आपसी रिश्तेदारियां हैं । उन्होंने ऐसे लोगों को आवाहन किया कि आपसी समन्वर कर इस वैमनस्य को कम करें । उन्होंने सभी उपस्थित संगठनों से आवाहन किया कि बिना किसी राष्ट्रीय सीमा में बंधे भारत व नेपाल को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिये कार्य करें ।
३. श्री. प्रियानंद शर्मा, ऑल मणिपुर धर्म रक्षा समिति, मणिपुर - मणिपुर से सनातन धर्म समाप्त किया जा रहा है । भारत के सभी हिन्दू संगठनों को मणिपुर के हिन्दुओं के लिए आवाज उठानी चाहिए ।
४. श्री अजय सिंह, अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष, वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन - हमें केवल भारत में हिन्दू राष्ट्र नहीं, बल्कि हिन्दू विश्व का लक्ष्य रखना चाहिए । अनेक देशों में सनातन धर्म की स्वीकार्यता बढ रही है । भारत में हिन्दू राष्ट्र आते ही अनेक देश हिन्दू राष्ट्र की कल्पना को अपनाएंगे ।
५. श्री अनुपम मिश्रा, संपादक, प्रयागराज टाइम्स, प्रयागराज – श्री. अनुपम मिश्रजी ने जिज्ञासुओं का उद्बोधन करते हुए बताया कि ‘‘हिन्दू बुद्विवादी होने के कारण भ्रम की स्थिति में है । आज जो विधर्मी अपने को अत्यंत मजबूत तथा कट्टर दिखाते हैं, वास्तविकता तो यह है कि वह सभी कभी हिन्दू ही थे और जिन्होंने समर्पण कर दिया, वे इस्लाम धर्म के बन गए और जो झुके नहीं, वे आज भी हिन्दू हैं, तो वास्तव में मजबूत तथा सबल कौन हुआ ? आज इस्लाम लोकतंत्र का इस्तेमाल कर रहा है, इस देश के लोकतंत्र का कत्ल करने के लिए । आज झारखंड में हिन्दुओं को जजिया कर देना पड रहा है, गायों को बांधने के लिए अपनी ही भूमि पर उन्हें पैसा देना पड रहा है । यह हमें समझना होगा कि हमारा संगठन इस परिपेक्ष्य में कितना आवश्यक है ।’’
६. श्री. प्रवीण चतुर्वेदी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्राच्यम् – विश्व का प्रथम हिन्दू ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘प्राच्यम्’ के संस्थापक श्री. प्रवीण चतुर्वेदी ने बताया कि ‘‘अपने युवाओं को बचाकर रखने के लिए आवश्यक है कि हम उन्हें संस्कृति में तथा परंपराओं में जोडकर रखें, तभी हम मिलकर भारत को हिन्दू राष्ट्र बना पाएंगे ।’’
७. डॉ. दिलावर सिंह, इंटरनेशनल श्रीराम वैदिक एंड कल्चरल यूनियन, अध्यक्ष, ऑस्ट्रेलिया – विश्व का सबसे ऊंचा मंदिर ७२१ फुट ऊंचा राम मंदिर ऑस्ट्रेलिया में निर्मित होगा । ऑस्ट्रेलिया में हम १५० एकड में राम मंदिर का निर्माण कराते हुए हिन्दुत्व के लिए कार्य कर रहे हैं । ऑस्ट्रेलिया की मूल जनसंख्या हिन्दुओं की ही थी; परन्तु कन्वर्जन का पाठ पढाकर हिन्दुओं को अल्पसंख्यक की स्थिति तक पहुंचा दिया गया है एवं उनकी स्थिति दयनीय हो गई है ।
८. सनातन संस्था के श्री. चेतन राजहंस – भारत में विकास कार्यों को रोकना एवं धर्मांतरण की समस्या के पीछे ‘डीप स्टेट’ ही
है । चर्च का डीप स्टेट में बडा सहभाग है । (‘डीप स्टेट’ अर्थात सरकारी अधिकारी एवं निजी संस्था का गुप्त जाल । इस
व्यवस्था द्वारा सरकारी नीतियां निजी संस्थाओं के लिए अनुकूल बनाए जाते हैं ।)
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