निरोगी जीवन के लिए व्यायाम !

वर्तमान आधुनिकीकरण के कारण जीवन में उत्पन्न हुई शारीरिक समस्याओं पर ‘व्यायाम’ एक बहुत प्रभावशाली समाधान सिद्ध हुआ है । वर्तमान में उत्पन्न हो रही अनेक शारीरिक समस्याओं पर औषधीय चिकित्सा के साथ अनेक अन्य विकल्प चुने जाते हैं; परंतु व्यायाम के बिना ये सर्व उपाय अधूरे सिद्ध होते हैं । इस स्तंभ से हम व्यायाम की आवश्यकता तथा उसके महत्त्व की जानकारी लेनेवाले हैं, साथ ही व्यायाम के संबंध में शंकाओं का समाधान भी करेंगे ।
‘शरीर का कार्य चलते रहने के लिए शरीर को आवश्यक प्राणवायु (ऑक्सीजन) की आपूर्ति करने का कार्य फेफडे करते हैं । यह प्राणवायु (ऑक्सीजन) शरीर की प्रत्येक कोशिका को कार्य करने की ऊर्जा प्रदान करती है, साथ ही शरीर में स्थित अनावश्यक घटकों को जलाकर शरीर की आंतरिक शुद्धि भी करता है । शरीर में जितनी अधिक मात्रा में प्राणवायु (ऑक्सीजन) आती है, शरीर के स्वस्थ रहने की संभावना उतनी ही अधिक होती है; परंतु सामान्य व्यक्ति अपने फेफडों की केवल १० से १२ प्रतिशत क्षमता का ही उपयोग करता है ।

व्यायाम की प्रभावकारिता फेफडों की क्षमता पर निर्भर होती है । फेफडों की क्षमता में सुधार आने से सभी अंगों की निरंतर कार्यवृद्धि होकर थकान घटती है । ‘फेफडों की क्षमता तथा श्वसन की पद्धति में सुधार लाने हेतु प्रयास करना’ व्यायाम का एक अभिन्न अंग है । इसके लिए नियमितरूप से प्राणायाम तथा श्वसन से संबंधित व्यायाम करें ।’
– कु. वैदेही राजेंद्र शिंदे, भौतिकोपचार (फिजियोथेरपी) अध्येता, फोंडा, गोवा. (२.९.२०२४)
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