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नई दिल्ली – दिल्ली मद्य घोटाला मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत दे दी है। सिसौदिया को अधिक दिनों तक जेल में नहीं रखा जाना चाहिए । सेशन एवं उच्च न्यायालय को इसे समझने की आवश्यकता है । न्यायालय ने यह भी कहा कि जमानत नियम है तथा जेल अपवाद है। इस बार न्यायालय ने उन्हें १० हजार रुपये के दंड भरने पर जमानत दे दी है । इस संबंध में ९ अगस्त को सुनवाई हुई थी ।
इस समय प्रवर्तन निदेशालय के वकीलों ने मांग की थी कि ‘सिसोदिया को सेशन कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन करने के लिए कहा जाना चाहिए । ‘ इस मांग का भी न्यायालय ने विरोध कर दिया । अदालत ने कहा, ”सिसोदिया को जमानत के लिए सत्र न्यायालय भेजना अदालत की अवमानना होगी।” इसी तरह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी पिछले ३ माह से जेल में है । उन्हें २० अगस्त तक न्यायिक बंदी में भेज दिया गया है।
क्या है मद्य नीति घोटाला प्रकरण ?
दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार ने नई उत्पाद शुल्क नीति लागू की थी। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने विश्वास जताया था कि इस नीति से करोड़ों रुपये की आय होगी तथा शराब माफिया पर लगाम लगेगी। इसके चलते सभी सरकारी एवं व्यक्तिगत शराब की दुकानें बंद कर दी गईं तथा नए टेंडर जारी किए गए। पहले राज्य में ७२० शराब की दुकानें थीं। इनमें केवल २६० निजी दुकानें थीं। लेकिन नई नीति के बाद सभी दुकानें निजी व्यापारियों के पास चली गईं। इसके चलते इस नीति को लागू करने में घोटाले के आरोप लगे । इसके बाद की जांच में उपमुख्यमंत्री सिसौदिया, कुछ अन्य नेताओं को बंदी बनाने के साथ-साथ मुख्यमंत्री केजरीवाल की भी घोटाले में संलिप्तता सामने आई।
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