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हेग (नेदरलैंड्स) – इजराइल ने अपने सामर्थ्य का दुरुपयोग कर फिलिस्तीनियों के अधिकार छिन लिए हें । इजराइल अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहा है । इजराइल ने फिलिस्तीनियों को इस क्षेत्र पर इतने वर्षों तक राज करने की अदायगी / भरपाई देनी चाहिए, इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस’ ने (‘आइ.सी.ए.’ने) ऐसा आदेश दिया । इजराइल ने वर्ष १९६७ में अरब देशों को पराजित कर पश्चिम किनारा, पूर्व जेरुसलेम तथा गाजा पट्टी को अपने नियंत्रण में लिया था । इस संदर्भ में ‘आइ.सी.ए.’ ने उपरोक्त निर्णय लिया है । इस निर्णय के पश्चात वेस्ट बैंक में स्थायी इजराइली लोग भडक उठे । उन्होंने पश्चिम तट के समीप बुरीन नामक फिलिस्तीनी गांव में आग लगाई । इस समय इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यह निर्णय अस्वीकार कर इसे ‘झूठा निर्णय’, बताया है ।
१. ‘आइ.सी.ए.’ १५ न्यायाधीश हैं, जिनमें ११ न्यायाधीशों ने इजराईल के विरोध में निर्णय दिया । राइटर्स के समाचार के अनुसार ‘आइ.सी.ए.’ का यह निर्णय केवल एक परामर्श है, जिसे स्वीकार करने के लिए इजरायल को विवश नहीं किया जा सकता ।
२. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक निवेदन में कहा है कि ज्यू लोगों ने फिलिस्तीनियों की भूमी पर नियंत्रण नहीं प्राप्त किया है । वे जिस स्थान पर रहते हैं, वह उनकी स्वयं की भूमी है । जेरुसलेम व्याप्त भूमि नहीं, अपितु वह इजरायल की राजधानी है । ‘आइ.सी.ए.’ इस ऐतिहासिक सत्य को अस्वीकार नहीं कर सकता ।

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