धूमपान : श्वसनतंत्र के विकारों पर प्रतिबंधजन्य आयुर्वेदीय चिकित्सा !
धूम का अर्थ धुआं और पान का अर्थ पीना ! औषधीय धुआं नाक-मुंह से अंदर लेकर उसे बाहर छोडने को धूमपान कहते हैं । श्वसनतंत्र से संबंधित वात एवं कफ के विकार, उदा. सरदी, खांसी और दमा न हो और हो जाए, तो शीघ्र स्वस्थ हों; इसके लिए धूमपान (औषधीय धुआं लेना) की चिकित्सा बताई गई है ।