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मुंबई – छात्रों के कलागुणों को अवसर मिले, साथ ही उनके व्यक्तित्व का विकास हो; इसके लिए राज्य की सरकार ने मराठी विद्यालयों में लोकप्रिय व्यक्तियों द्वारा छात्रों को १८ कलाओं की शिक्षा देने का निर्णय लिया है । इसमें संगीत, गायन, नाटक, भाषण कला, चित्रकला आदि कलाओं का समावेश है । राज्य के शिक्षामंत्री दीपक केसरकर ने ९ फरवरी को पत्रकार परिषद में यह जानकारी देते हुए कहा कि आनेवाले शैक्षणिक वर्ष से यह शिक्षा आरंभ की जाएगी ।
उन्होंने कहा, ‘‘विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ ऑनलाइन पद्धति से छात्रों से सीधे संवाद कर संबंधित कला की जानकारी देंगे । पहले चरण में राज्य सरकार के द्वारा संचालित ६५ सहस्त्र विद्यालयों का समावेश है । पहली कक्षा से लेकर ८ वीं कक्षा तक के छात्रों को यह शिक्षा दी जाएगी । छात्रों को यह शिक्षा देने के उपरांत ‘छात्रों ने इन कलाओं को कितना आत्मसात किया है ?’, इसका परीक्षण करने हेतु प्रतियोगिताएं भी ली जाएंगी । जिससे छात्रों के व्यक्तित्व विकास में सहायता मिलेगी ।
शनिवार का दिन छात्रों के लिए आनंदमय बनाएंगे !
सोमवार से शुक्रवार की अवधि में छात्रों को क्रमिक पुस्तकों में स्थित पाठ्यक्रम पढाया जाएगा; परंतु शनिवार का दिन छात्रों के लिए आनंदमय होगा । शनिवार का दिन संगीत, कृषि, वाचन आदि हेतु आरक्षित रखा जाएगा । सप्ताह में यह एक दिन छात्रों के खेलने के लिए होगा । इस विषय में शिक्षा विभाग की ओर से विस्तृत रेखांकन बनाया जा रहा है । छात्रों के लिए कृषि से संबंधित शिक्षा अनिवार्य की जाएगी ।
समयसत्र में बदलाव न करनेवाले विद्यालयों की अनुज्ञप्ति रद्द की जाएगी !राज्य सरकार ने २ दिन पूर्व ही विद्यालयों के सवेरे ७ बजे के समय को बदलकर उसे ९ बजे कर दिया है । इस विषय में जानकारी देते हुए शिक्षामंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि छात्रों की सुविधा की दृष्टि से यह परिवर्तन किया गया है । जो विद्यालय समयसत्र में बदलाव नहीं करेंगे, उन्हें कानून की लाठी दिखानी पडेगी । प्रति ३ वर्ष उपरांत प्रत्येक निजी विद्यालय को अपनी अनुज्ञप्ित का नवीनीकरण कर लेना पडता है, अतः विद्यालय के समयसत्र में बदलाव न करनेवाले विद्यालयों की अनुज्ञप्ति रद्द की जाएगी । |
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