
१. वामपंथी इतिहासकारों के कारण रामजन्मभूमि का विवाद बढा !
रामजन्मभूमि के संदर्भ में विवाद बढाने के लिए के. मोहम्मद, साम्यवादी इतिहासकार अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इरफान हवीन तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की रोमिला थापर और देहली विश्वविद्यालय के आर.एस. शर्मा को उत्तरदायी प्रमाणित करते हैं । साम्यवादी इतिहासकारों ने यह प्रमाणित करने का प्रयास किया कि अयोध्या में मानवीय हस्तक्षेप के प्रमाण नहीं मिले हैं । साम्यवादी इतिहासकारों ने लोगों को भ्रमित किया व उससे यह प्रकरण उलझता गया । ७० के दशक में और उसके पश्चात भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशानुसार की गई खुदाई में अयोध्या में मंदिर के अवशेष मिले हैं ।

२. खुदाई में प्राप्त मंदिर के अवशेष !
इस खुदाई में हमें मंदिर के स्तंभों के नीचे ईटों की एक रचना दिखी । मुझे मस्जिद की दीवार में मंदिर के स्तंभ दिखाई दिए । स्तंभ के निचले भाग में ११ वीं एवं १२ वीं शताब्दी के मंदिर में दिखनेवाले संपूर्ण कलश दिखाई दिए ।

मंदिर कला में ये कला ८ ऐश्वर्यप्रतीकों में से एक है । हमने पहले जिन पत्थर के स्तंभों के संदर्भ में बताया, उसके आधार पर मैंने कहा था कि मस्जिद के नीचे मंदिर था । मस्जिद के ढेर में विष्णु हरिशिला पटल मिला । उसमें ११वें-१२वें शतक की नागरी लिपी में संस्कृत में लिखा है कि यह मंदिर श्रीविष्णु को समर्पित है । यहां शिव-पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां भी मिली हैं ।
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