अयोध्या की भांति भारत को रामराज्य का गतवैभव दिलाना है !

‘रामलला के भव्य मंदिर के कारण अयोध्या को गतवैभव प्राप्त हुआ है । अब हमें भारत का खोया हुआ वैभव पुन: प्राप्त करने हेतु प्रयास करने हैं । आज भी आदर्श राज्य के रूप में रामराज्य की ओर देखा जाता है । प्रभु श्रीराम के काल में संपूर्ण प्रजा धर्मपालक तथा रामभक्त थी; इसलिए उसे श्रीराम जैसे धर्मपालक राजा एवं रामराज्य मिला । भारत को भी पुनः रामराज्य का गतवैभव प्राप्त कराने हेतु हिन्दू समाज को धर्मपालन एवं रामभक्ति कर आध्यात्मिक बल बढाना होगा ।’
– श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी की एक उत्तराधिकारिणी)
श्रीराम मंदिर के उपरांत सर्वत्र रामराज्य की स्थापना ही हमारा ध्येय होगा !

‘विगत ५०० वर्षों से रामभक्तों को उनके प्रभु से अलग करनेवाले इस्लामी आक्रमणकारी अंतत: पराजित हो गए । भक्ति, ज्ञान एवं कर्म, इन तीनों स्तरों पर अर्थात सभी प्रकार से हिन्दू विजयी हुए । इस प्रदीर्घ संघर्षमय काल से संवरकर, निखरकर निकले हिन्दू जनसमुदाय को श्रीराममंदिर की प्रतिष्ठा के इस दिव्य क्षण में हिन्दू धर्म की रक्षा हेतु निरंतर कार्य करने का वचन अपने आराध्य प्रभु श्रीराम को देना चाहिए । श्रीराममंदिर के उपरांत अब सर्वत्र रामराज्य की स्थापना ही हमारा ध्येय होगा !’
– श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी की एक उत्तराधिकारिणी)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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