(‘एल्.जी.बी.टी.क्यू.’ आंदोलन अर्थात समलैंगिक, उभयलैंगिक, तथा लिंगपरिवर्तन किए लोगों का आंदोलन)

मॉस्को (रूस) – रूस के सर्वाेच्च न्यायालय ने देश में ‘एल्.जी.बी.टी.क्यू.’ आंदोलन पर प्रतिबंध लगाया । रूस के कानून मंत्रालय ने प्रतिबंध लगाने की मांग की थी । न्यायालय ने इसे सहमति दर्शाई । न्यायालय ने इसकी सुनवाई कैमरे में की । इस समय समलैंगिक संबंध रखनेवालों का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था । इस प्रतिबंध के कारण इससे संबंधित कोई भी कृत्य गैरकानूनी समझा जाएगा । इस कारण ‘एल्.जी.बी.टी.क्यू.’ समुदाय को बंदी बनाए जाने का भय लग रहा है । इसलिए उन्होंने रूस से पलायन करने की सिद्धता आरंभ की है ।
(सौजन्य : Global News)
अगले वर्ष मार्च महीने में रूस में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होनेवाले है । बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति पुतिन ने विदेशों की रूस के विरुद्ध जो नीतियां हैं, उनके विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए ही ‘एल्.जी.बी.टी.क्यू.’ आंदोलन पर प्रतिबंध लगाया; क्योंकि रूस मानता है कि यह आंदोलन पश्चिमी देशों का प्रचार है, तो पुतिन पारंपारिक मूल्यों के समर्थक हैं । पुतिन ने एक भाषण में कहा था कि पश्चिमी देशें में समलैंगिकता के संचलन आदि का स्वागत किया जाता है; परंतु ऐसे कृत्यों को अन्य देशों पर थौंपना ठीक नहीं है ।
३ वर्ष पहले ही संविधान में परिवर्तन कर रूस ने निश्चित किया है कि, ‘देश में पुरुष और महिलाओं के विवाह को ही मान्यता मिलेगी, समलैंगिक संबंधों को मान्यता नहीं दी जाएगी ।’
थूकने वालों से अब ढाई सहस्र रुपये दंड वसूल करें ! – मुंबई उच्च न्यायालय
हिन्दु विवाह अधिनियम के अनुसार विवाह को वैध ठहराने के लिए केवल विवाह प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं है ।– Gujrat High Court
यदि ईरान ने मेरी हत्या की, तो उस पर अभूतपूर्व बमबारी करो ।– Donald Trump
जम्मू न्यायालय ने पुलिस से अभिलेख की मांग की ।
ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर २० प्रतिशत शुल्क वापस लिया
Three Language Policy : क्या अंग्रेजी को भारत की ही स्थानीय भाषा माना जा सकता है – सर्वोच्च न्यायालय का प्रश्न