
‘ज्वर आने पर संभव हो, तो एक समय कुछ न खाते हुए उपवास करें । उपवास करना संभव न हो तो एक पतीले में थोडे चावल लें तथा उसमें सदा की अपेक्षा थोडा अधिक पानी डालकर उन्हें पका लें; जब वह अच्छे से पक जाएं तो, बचे हुए पानी को छानकर उस पानी में स्वाद के अनुसार नमक डालें । इस पानी को ‘पेज’ कहते हैं । पेज पीने से शीघ्र ही स्फूर्ति आती है । १ – २ समय ‘पेज’ पीने से थकान दूर हो जाती है तथा ज्वर शीघ्र ठीक होने में सहायता होती है । इसके उपरांत भूख लगने पर दालचावल, सूजी का उपमा अथवा हलवा, चावल को बिना खमीर उठाए बनाया नीर डोसा, चावल अथवा ज्वारी की लाई, मूंगदाल पकाकर उसमें स्वाद के अनुसार नमक तथा गुड डालकर बनाई ‘पतली दाल’ ऐसे पचने में हल्के पदार्थ थोडा पेट खाली रखते हुए खाएं ।’
– वैद्य मेघराज माधव पराडकर, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (२८.१०.२०२३)
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सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
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ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
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