
‘श्री गणेश चतुर्थी’ पर चंद्र को नहीं देखा जाता । इस दिन चंद्र का दर्शन करना वर्जित होता है । ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो चंद्र दर्शन करता है वह मिथ्या आरोप से कलंकित होता है । भूल से चतुर्थी को चंद्रदर्शन हो जाए तो ‘श्रीमद्भागवत’ के १०वें खंड के अध्याय ५६-५७ में दी गई कहानी ‘स्यमंतक मणी की चोरी’ पढनी अथवा सुननी चाहिए । भाद्रपद शुक्ल तृतीया या पंचमी को चंद्रमा देखें । इससे चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करने का अधिक धोखा नहीं रहता ।(Ganeshotsav, Ganesh Chaturthi, Ganapati)

यदि भूल से चंद्रदर्शन हो जाए तो निम्नलिखित मंत्र से अभिमंत्रित किए हुए जल का प्राशन करें । मंत्र का २१, ५४ अथवा १०८ बार जप कर सकते हैं ।
सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः ।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः ॥ — ब्रह्मवैवर्त पुराण, अध्याय ७८
अर्थ : हे सुकुमार! सिंह ने इस मणि के लिए प्रसेन को मारा तथा जाम्बवन्त ने उस सिंह को मार डाला ; अत: तुम दुखी मत हो । अब इस स्यमन्तक मणि पर तुम्हारा ही अधिकार है ।
अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास का महत्त्व !
(और इनकी सुनिए …) ‘मार्ग पर नमाज पढना अनुचित है, तो सभी त्योहारों के उत्सवों पर प्रतिबंध लगाइए !’ : AIMIM Asaduddin Owaisi
अधिक मास में सनातन संस्था के ग्रंथ और लघुग्रंथ अन्यों को देकर सर्वश्रेष्ठ ज्ञानदान का फल प्राप्त करें !
राज्य के प्रार्थनास्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों की आवाज सीमित रखें ! – Suvendu Adhikari
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अक्षय तृतीया विशेष