सभी पाठक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमियों से नम्र विनती !

१. अधिक मास में ज्ञानदान का विशेष महत्त्व होता है
‘१८.७.२०२३ से १६.८.२०२३ के समयावधि में ‘अधिक मास’ है । शास्त्रकारों ने कहा है, ‘अधिक मास में मंगलकार्य करने की अपेक्षा विशेष व्रत एवं पुण्यकारक कृत्य करने चाहिए ।’ इस मास में दान करने से उसका फल अधिक मिलता है । इसलिए इस काल में वस्त्रदान, अन्नदान व ज्ञानदान करने का विशेष महत्त्व है । भारतीय संस्कृति में ‘ज्ञानदान’ को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है । इसलिए अनेक लोग इसके लिए प्रयत्नरत रहते हैं ।
२. सनातन की सर्वांगस्पर्शी ग्रंथसंपदा, अर्थात ज्ञानदान करने का सर्वाेत्तम माध्यम !
सनातन की विविधतापूर्ण एवं सर्वांगस्पर्शी ग्रंथसंपदा, अर्थात चिरंतन ज्ञान की अनमोल धरोहर ! सनातन द्वारा ‘अध्यात्म, साधना, देवताओं की उपासना, आचारधर्म, धर्माचरण, बालसंस्कार, राष्ट्ररक्षा, धर्मजागृति, ईश्वरप्राप्ति के लिए कला, आपातकाल में जीवित रहने के उपचार’ इत्यादि विषयों पर ३६२ ग्रंथ एवं लघुग्रंथ प्रकाशित किए हैं । ये ग्रंथ सहज सरल भाषा में पाठकों को अमूल्य ज्ञान देते हैं, साथ ही धर्म के प्रति श्रद्धा भी बढाते हैं । इसलिए अधिक मास में ऐसे ग्रंथदान द्वारा ज्ञानदान कर पुण्यसंचय के साथ ही आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त करें ।
यदि अन्यों को देने के लिए सनातन के ग्रंथ एवं लघुग्रंथ चाहिए तो उनकी मांग शीघ्रतिशीघ्र स्थानीय वितरकों के पास करें या
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