भारत द्वारा कश्मीर में जी-२० की बैठक आयोजित करने का प्रकरण

जिनेवा (स्विट्जर्लैंड)/नई देहली – कश्मीर में होनेवाली जी-२० बैठक के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी द्वारा लगाए आरोप भारत ने अस्वीकार कर दिए हैं । संयुक्त राष्ट्र के अल्पसंख्यक व्यवहार प्रतिनिधि फर्नांड डी वर्नेस ने जम्मू-कश्मीर तथा वहां के अल्पसंख्यकों के प्रश्नों पर एक निवेदन प्रसारित किया था । उसमें उन्होंने भारत पर बल का तर्कहीन प्रयोग कर अल्पसंख्यकों को दबाने का आरोप लगाया था तथा घाटी के अल्पसंख्यकों के प्रश्न के संदर्भ में चिंता व्यक्त की थी । (क्या वर्नेस कभी पाकिस्तान तथा बांग्ला देश के अल्पसंख्यक हिन्दुओं की समस्याओं पर भाष्य करते हैं ? कहीं ऐसा तो नहीं कि वहां के हिन्दुओं को मानवाधिकार नहीं हैं ? – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात) इस पर भारत ने कहा कि फर्नांड डी वर्नेस के आरोप निराधार तथा झूठे हैं । भारत उनका खंडन करता है । जी-२० के अध्यक्ष के अनुसार भारत को देश के किसी भी भाग में इस शिखर परिषद की बैठकें आयोजित करने का अधिकार है ।
UN Special Rapporteur Fernand de Varennes makes multiple false claims about the situation in Jammu and Kashmir https://t.co/zDkveQWHGM
— HinduPost (@hindupost) May 17, 2023
संयुक्त राष्ट्र के भारतीय अधिकारियों ने भारत की भूमिका स्पष्ट करते हुए आगे कहा कि फर्नांड का वक्तव्य अत्यंत दायित्वशून्य है । वे जम्मू-कश्मीर के सूत्र पर राजनीति करने का प्रयास कर रहे हैं । उन्होंने अपने पद का अनुचित प्रयोग कर सामाजिक माध्यम पर प्रसिद्धि प्राप्त करने का प्रयास किया है । वास्तव में उन्होंने जो कुछ कहा, वह पूर्वग्रह दूषित होने का परिणाम है तथा वह संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि के रूप में अनुचित कृत्य है ।
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