सनातन का ‘घर-घर रोपण’ अभियान

‘घर के घर ही में शाक-तरकारी का रोपण करने के लिए कुछ भी खरीदना नहीं पडता । तेल के खाली डिब्बे, पुराने टब अथवा प्लास्टिक के पुराने बर्तन, रंग (पेंट) की बाल्टियां, अनाज की बोरियां, पुराने टायर, कुछ भी न मिले तो छिद्र कर प्लास्टिक की थैलियों में शाक-तरकारी का रोपण सहजता से कर सकते हैं । शहर में मिट्टी न मिलती हो, तो वह भी आगे दी हुई पद्धति से बना सकते हैं । नारियल की जटाएं, सूखे पत्ते और घास-फूस, घरों का गीला कचरा एकत्र कर फैलाकर रखने से लगभग २ माह में खाद मिट्टी (ह्यूमस) बन जाती है । मेथी के दाने, राई (सरसों), धनिया, चना, चवली इत्यादि सभी के घरों में उपलब्ध होती है । इन्हें बीज के रूप में उपयोग कर सकते हैं । हाट (बाजार से) लाया गया पालक अथवा पुदीना, कई बार उनमें कुछ जडसहित होते हैं जिसे मिट्टी में खोंसने पर उनसे नए पौधे आते हैं ।
– श्रीमती राघवी मयूरेश कोनेकर, फोंडा, गोवा.
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?