
‘अप्रैल २०२२ में घर में हाट (बाजार) से कुछ शकरकंद लाए थे । उनमें से एक में शकरकंद में छोटा-सा अंकुर आया था । इस अंकुर को काटकर मैंने मिट्टी में गाढ दिया था । तदुपरांत, उससे बेल तैयार हो गई । फिर केवल ३ माह पश्चात अर्थात जुलाई २०२२ में छायाचित्र में दिखाए अनुसार शकरकंद मिले । इनका कुल वजन २ किलो २५० ग्राम था । शकरकंद की बेल काटकर और भी रोपण कर सकते थे । इसके लिए मुझे कोई भी विशेष परिश्रम नहीं करने पडते । ‘हम छोटी-सी भी कृति करते हैं, तो भगवान कितना देते हैं’, इसकी ही यह अनुभूति है । अत: प्रत्येक के लिए अपने घर में ही प्राकृतिक पद्धति से रोपण करने पर घर के घर में ही विषमुक्त अन्न की निर्मिति करना संभव है ।’
– श्रीमती राघवी मयूरेश कोनेकर, ढवळी, फोंडा, गोवा. (३०.७.२०२२)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?