
‘अब आपातकाल की तीव्रता प्रतिदिन बढती जा रही है । उसके कारण सभी साधकों की व्यष्टि एवं समष्टि साधना नियमित होनी चाहिए । साधकों में व्यष्टि एवं समष्टि साधना के प्रति गंभीरता होने पर ही उनसे साधना हेतु नियमित प्रयास होंगे । इसके आगे उत्तरदायी साधक सभी साधकों की स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन की सारणी का ब्योरा लें । प्रत्यक्ष रूप से ब्योरा लेना संभव न हो, तो वह चल-दूरभाष अथवा ई-मेल के द्वारा भी लिया जा सकता है । साधकों के व्यष्टि साधना के प्रयास खंडित न हों; इसके लिए इस प्रकार की ब्योरा पद्धति सर्वत्र स्थापित करना आवश्यक है ।’
– श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (८.१०.२०२२)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?