
‘अब आपातकाल की तीव्रता प्रतिदिन बढती जा रही है । उसके कारण सभी साधकों की व्यष्टि एवं समष्टि साधना नियमित होनी चाहिए । साधकों में व्यष्टि एवं समष्टि साधना के प्रति गंभीरता होने पर ही उनसे साधना हेतु नियमित प्रयास होंगे । इसके आगे उत्तरदायी साधक सभी साधकों की स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन की सारणी का ब्योरा लें । प्रत्यक्ष रूप से ब्योरा लेना संभव न हो, तो वह चल-दूरभाष अथवा ई-मेल के द्वारा भी लिया जा सकता है । साधकों के व्यष्टि साधना के प्रयास खंडित न हों; इसके लिए इस प्रकार की ब्योरा पद्धति सर्वत्र स्थापित करना आवश्यक है ।’
– श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (८.१०.२०२२)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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