
१. पाकिस्तान के खैबर पख्तुनख्वा प्रदेश पर अफगानिस्तान का दावा !
‘क्या पाकिस्तान में गृहयुद्ध आरंभ होगा ? तथा क्या पाकिस्तान के बाहर से ‘अफगानिस्तान तालिबान’ तथा पाकिस्तान की सीमा के अंदर ‘तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ एकत्र होकर पाकिस्तान को कुचल डालेंगे ? साथ ही खैबर पख्तुनख्वा, वजीरीस्तान अथवा जिसे ‘नॉर्थ वेस्ट फ्रंटीयर प्रॉविंस’ (वायव्य सीमा प्रांत) कहा जाता है, तो क्या यह प्रदेश पाकिस्तान से अलग होकर अफगानिस्तान में अंतर्भूत होगा ?’, ऐसे अनेक प्रश्न सामने आ रहे हैं । २ वर्ष पूर्व जब अफगानिस्तान में तालिबान का राज्य आया, उस समय सर्वप्रथम तालिबान ने ‘ड्यूरंट रेखा’ (अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान के मध्य की सीमा) उन्हें अस्वीकार होने की बात कही थी । उन्हें ऐसा लगता है कि अफगानिस्तान के और प्रदेश अभी भी पाकिस्तान में हैं । पाकिस्तान के खैबर पख्तुनख्वा प्रदेश से इमरान खान चुनकर आते हैं । इस क्षेत्र में पठान, पख्तुन अथवा पश्तुन लोग रहते हैं । उसके कारण अफगानिस्तान को ऐसा लगता है कि यह प्रदेश भी अफगानिस्तान में अंतर्भूत हो तथा आज यही लोग तालिबानी बनकर वहां राज कर रहे हैं । इस प्रकार उनकी इच्छा है कि ‘सभी पठान एक ही छत के नीचे आएं ।’ अर्थात पाकिस्तान को यह स्वीकार नहीं है; क्योंकि यदि यह प्रदेश पाकिस्तान से अलग हुआ, तो पाकिस्तान के केवल टुकडे ही नहीं होंगे, अपितु ‘तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ समूह के शिविर, प्रशिक्षण शिविर तथा प्रशासनिक शिविर जो अफगानिस्तान में हैं; वहां से वे पाकिस्तान के खैबर पख्तुनवा में आतंकी आक्रमण करते हैं । वे पाकिस्तान की सेना तथा पाकिस्तान के अर्धसैनिक बलों पर आक्रमण करते हैं । कुछ समय से इस प्रदेश में बडे स्तर पर हिंसा बढी हुई है, जिसमें पाकिस्तान को बहुत हानि पहुंची है ।
२. ‘तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ के आक्रमण के कारण पाकिस्तान असहाय !
इससे पूर्व पाकिस्तान की लगभग ८५ प्रतिशत सेना भारत-पाक सीमा पर तैनात थी, जबकि अफगानिस्तान-पाक सीमा पर पाकिस्तानी सेना की केवल १ ‘कोर’ (टुकडी) तैनात थी । पाकिस्तान को भय है कि ‘अफगानिस्तान की सेना तथा तालिबान के लोग पख्तुनख्वा प्रदेश को अपने नियंत्रण में कर लेंगे ।’ उसके कारण अब वहां पाकिस्तान के सैनिक बडी संख्या में तैनात होते हैं । ‘ड्यूरंट रेखा’ पर पाकिस्तानी सेना ने घेरा बनाने का कार्य आरंभ किया था; परंतु अफगानिस्तान ने अनेक बार आक्रमण कर उस घेरे को ही तोड डाला । उन्होंने पाकिस्तान को घेरा बनाने ही नहीं दिया । ‘तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ पाकिस्तानी सेना पर सदैव आक्रमण करता है; उसके कारण पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से उन पर किए जा रहे आक्रमण रोकने के लिए कहा है; परंतु अफगानिस्तान को यह स्वीकार नहीं है ।
३. गृहयुद्ध एवं विकट अर्थव्यवस्था के कारण पाकिस्तान की स्थिति दयनीय
कुछ माह पूर्व ‘तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ एवं पाकिस्तानी सेना में शस्त्रसंधि हुई थी; परंतु वह दिसंबर में समाप्त हो गई । उसके उपरांत पाकिस्तान पर ‘तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ के आक्रमण पुनः आरंभ हुए हैं । वैसे देखा जाए, तो ‘तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ कोई अकेला समूह नहीं है, अपितु पाकिस्तान से अलग होने के इच्छुक अनेक समूह हैं । यहां मैं केवल दो का ही उल्लेख कर रहा हूं ।
बलुचिस्तान में स्वतंत्रता संग्राम चल रहा है । बलुचिस्तान को अलग होकर स्वतंत्र राज्य बनना है । आपको स्मरण होगा कि वर्ष १९४७ में बलुचिस्तान ने भारत में अंतर्भूत होने की इच्छा व्यक्त की थी; परंतु उस समय सीमा एकत्रित न होने से वे ऐसा नहीं कर पाए । पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भी ‘जियो सिंध’ नामक स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा है । पाकिस्तान में एक ओर बडे स्तर पर गृहयुद्ध चल रहा है, तो दूसरी ओर उनकी अर्थव्यवस्था अत्यंत विकट स्थिति से संघर्ष कर रही है । कुछ दिन पूर्व ही मिले समाचार के अनुसार अब पाकिस्तान ने सायंकाल के समय बिजली की आपूर्ति बंद करना सुनिश्चित किया है । इस गृहयुद्ध के कारण पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान के मध्य बडे स्तर पर मुठभेड हो रही है ।
४. अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार के कारण पाकिस्तान की हानि !
जब तालिबान बना था, उस समय पाकिस्तान को ऐसा लग रहा था कि अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार होने से अब पाकिस्तान को अफगानिस्तान में सामरिक दृष्टि से बडा स्थान मिलेगा । भारत ने यदि पाकिस्तान पर आक्रमण किया, तो पाकिस्तानी सेना अफगानिस्तान जाकर वहां से भारत से लड सकेगी; क्योंकि पाकिस्तान की सीमा से पाकिस्तान की चौडाई केवल १५० से २०० किलोमीटर ही है । अब पाकिस्तान को वहां सामरिक दृष्टि से अवसर मिलने के स्थान पर तालिबान को ही पाकिस्तान में सामरिक दृष्टि से अवसर मिला है । अफगानिस्तान में जब से तालिबान की सरकार आई है, तब से पाकिस्तान को उसका कोई लाभ मिलने की अपेक्षा बडी हानि ही हो रही है । तालिबान का राज्य आने के उपरांत हमें बहुत बल मिलेगा, हमारी अर्थव्यवस्था सशक्त बनेगी तथा हम विश्व में एक महत्त्वपूर्ण देश बन जाएंगे, ऐसा पाकिस्तान को लगता था; परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ, अपितु वहां केवल हिंसा बढने से पाकिस्तान की स्थिति बहुत दयनीय हो गई है । इसलिए ‘अफगानिस्तान तालिबान’ ने पाकिस्तान को जो धमकी दी है, उसमें बहुत तथ्य है । उसके अनुसार अब पाकिस्तान के टूटने की संभावना बहुत बढ गई है । पाकिस्तान टूटता है, तो खैबर पख्तुनख्वा प्रांत अफगानिस्तान को जाकर मिलेगा तथा उसके कारण पाकिस्तान का बल एवं आर्थिक शक्ति और क्षीण हो जाएगी ।’
– (सेवानिवृत्त) ब्रिगेडियर हेमंत महाजन, पुणे
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