
‘विश्व क्या कहेगा ?’ इस विचार से भारत विगत ७ दशकों से अधिक काल से गांधीवादी नीति अपनाते हुए आत्मघात कर ले रहा था; परंतु देश में मोदी सरकार आने से इसमें कुछ स्तर पर परिवर्तन आता हुआ दिखाई दे रहा है । विश्व स्तर पर भारत अब मुंहतोड उत्तर देने की भूमिका में दिखाई दे रहा है, यह एक अच्छा लक्षण है । इस प्रकार मुंहतोड उत्तर देना नैतिकता की दृष्टि से भले ही अनुचित होता है; किंतु जब देश की समस्या होती है अथवा अधर्म के विरुद्ध खडा रहना होता है, उस समय ऐसा करना ही पडता है । वह राजधर्म ही होता है । भारत अब इस राजधर्म का पालन कर रहा है, इसे एक सकारात्मक कदम मानना पडेगा । यह दर्शानेवाली एक घटना यह है कि कुछ वर्ष पूर्व अमेरिका ने पाकिस्तान को अमेरिकी बनावटवाले एफ-१६ लडाकू विमान दिए हैं । अब उन विमानों का नवीनीकरण करना आवश्यक है । इसके लिए अमेरिका ने पाकिस्तान के लिए ३.५ सहस्र करोड रुपए का पैकेज पारित किया है, जिसका भारत ने विरोध किया है । मूलरूप से अमेरिका ने सर्वप्रथम पाकिस्तान को ये विमान दिए थे, उस समय में भी भारत ने उसका विरोध किया था; परंतु उस समय की अंतरराष्ट्रीय स्थिति अलग थी । उस समय अमेरिका की दृष्टि में भारत का मूल्य नहीं था; परंतु आज की अंतरराष्ट्रीय स्थिति अलग है । अब अमेरिका भारत को आहत नहीं कर सकता । उसने वैसा किया, तो उसे हानि सहन करनी पडेगी है । यह हानि आर्थिक नहीं, अपितु नीतिगत होनेवाली है । उसके कारण यूक्रेन-रूस युद्ध के समय अमेरिका तथा यूरोपीय देशों के द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने के उपरांत भी भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात करना आरंभ किया । अमेरिका ने इस विषय पर भारत का विरोध करना टालकर कहा थाल ‘भारत उसके मित्रों के साथ संबंध रखने के लिए स्वतंत्र है ।’; परंतु इस समय ‘अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ-१६ के रखरखाव के लिए पैकेज देकर अनुचित क्या किया ?’, यह तो पहेली ही है । ‘इन विमानों का उपयोग आतंकियों के विरुद्ध किया जाएगा ।’ वास्तव में अमेरिका को ‘पाकिस्तान इन विमानों का उपयोग किसके विरुद्ध करनेवाला है ?’, यह स्पष्टता के साथ ज्ञात होने से इस प्रकार का निर्णय लेना संपूर्ण रूप से अनुचित होते हुए भी वह लिया गया है और इसी पर भारत ने उंगली उठाई है । भारत के विदेशमंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका से इसका स्पष्टीकरण पूछते समय एक ओर ऐसा बताया हो कि ‘आतंकियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए हम यह कर रहे हैं’; परंतु तब भी दूसरी ओर एफ-१६ जैसे लडाकू विमान क्यों और किसलिए दिए जा रहे हैं ?, यह सभी को ज्ञात है ।

ऐसी बातें बोलकर आप अन्यों को मूर्ख नहीं बना सकते । इस विषय पर अमेरिका की नीति निर्धारित करनेवालों से बात करने का अवसर मिला, तो मैं निश्चित रूप से उन्हें वे क्या कर रहे हैं ?, यह दिखा दूंगा ।’, ऐसा कहा है । भारत की ओर से अमेरिका को ऐसे सीधे शब्दों में बोलने की यह पहली ही घटना होगी, ऐसा ही कहना पडेगा; परंतु यही तक न रुककर पाकिस्तान को दिए जा रहे इस ३.५ सहस्र करोड रुपए का पैकेज रद्द करने के लिए अमेरिका को बाध्य बनाने के लिए अमेरिका की नाक दबाना आवश्यक है और उसे कैसे दबानी चाहिए ?’, यह जयशंकर जानते हैं; इसका यह उल्लेख करना होगा । भविष्य में वैसा हुआ, तो उससे आश्चर्य नहीं होना चाहिए ।
शस्त्रों का परिणामकारक उपयोग करने की क्षमता होनी चाहिए !
पाकिस्तान को दिए गए एफ-१६ विमानों का उपयोग भारत के विरुद्ध ही किया जाएगा, यह तो स्पष्ट ही है । वर्ष २०१९ में भारत के द्वारा की गई ‘एयर स्ट्राइक’ के उपरांत पाकिस्तान ने भारत पर हवाई आक्रमण करने का उपयोग किया था और वैमानिक अभिनंदन ने उनमें से एक विमान को भारत के लडाकू विमान ‘मिग’ से पीछा करते हुए गिराया था । अमेरिका ने भी इस प्रकार का विमान गिराए जाने की पुष्टि नहीं की थी । पुष्टि की भी जाती, तब ‘मिग’ जैसा पुरानी पीढी का विमान अमेरिका जैसे अत्याधुनिक विमान को भी गिरा सकता है’, इस प्रकार से अमेरिका की बदनामी हो जाती । इसी कारण ‘आगे जाकर भी ऐसी बदनामी न हो’; इसके लिए अमेरिका अब पाकिस्तान के पास स्थित विमानों का नवीनीकरण करने का प्रयास कर रहा है’, ऐसा कहना पडेगा । अमेरिका भले ही कितना भी प्रयास करे; परंतु भारतीय सेनादल ऐसे विमानों को अच्छा पाठ पढाएगा, इसमें कोई संदेह नहीं है । वर्ष १९६५ के युद्ध के समय पाकिस्तान ने अमेरिका द्वारा दिए गए तत्कालीन ‘पैटन’ टैंकों का उपयोग किया था; परंतु भारत ने उन्हें क्षत-विक्षत किया था, यह इतिहास सर्वविदित है ।

‘पाकिस्तान’ नाम की समस्या का स्थाई समाधान किया जाना चाहिए !
जयशंकर ने अमेरिका को भले ही मुंहतोड उत्तर दिया हो, तब भी पाकिस्तान नाम की समस्या का समाधान करना आवश्यक हो गया है । अंतरराष्ट्रीय स्थिति में परिवर्तन आने के कारण अमेरिका पहले की भांति पाकिस्तान को आर्थिक अथवा सैन्यसहायता नहीं करता हो; परंतु तब भी पाकिस्तान नाम का सिरदर्द भारत के लिए अभी भी जारी है । उसे दूर करने के लिए भारत को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीति बनाना आवश्यक है । कदाचित मोदी के नेतृत्व में भारत ने उस प्रकार से रणनीति बनाई भी होगी, इसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता; परंतु उसके परिणाम दिखाई देने भी आवश्यक हैं । पाकिस्तान में बाढ आने के उपरांत इतिहास में पहली बार भारत ने पाकिस्तान की किसी प्रकार की सहायता नहीं की । पाकिस्तान के एक मंत्री ने भारत से सहायता मिलने के संबंध में वक्तव्य भी दिया था, साथ ही मोदी ने ट्वीट कर बाढपीडितों के प्रति संवेदनाएं भी व्यक्त की थी; परंतु उसके आगे जाकर भारत ने कुछ नहीं किया । यह उचित ही हुआ । जो पहले ही होना आवश्यक था, वह अब हो रहा है । यह अच्छी बात है; परंतु तब भी अब निर्णायक स्थिति तक पहुंचना आवश्यक है । पाकिस्तान कभी भी दिवालिया बनने की संभावना है । अब उस पर अंतिम प्रहार करने की स्थिति बन रही है । भारत को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और पाकिस्तान नाम की समस्या का स्थाई समाधान निकालना चाहिए !
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