
नई देहली – राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति व्यंकैय्या नायडू ने खेद व्यक्त किया है कि राज्यसभा के सभापति के रूप में यह मेरा १४वां एवं अंतिम सत्र (अधिवेशन) है, विगत ५ वर्षों में बहुत कुछ सीख सका । विगत १३ सत्रों में नियोजित २४८ दिनों में से केवल १४१ दिन ही कार्य हो सका, अर्थात ५७ प्रतिशत समय व्यर्थ गया है ।
संपादकीय भूमिकासंसद के प्रत्येक अधिवेशन में समय व्यर्थ जाने की अवधि बडी होती है; परंतु इसके लिए उत्तरदायी व्यक्तियों से दंड वसूल नहीं किया जाता अथवा कठोर कार्रवाई भी नहीं की जाती । इस कारण इस स्थिति में कभी सुधार नहीं होता । यदि भारतीयों के राजस्व से चलाई जानेवाली संसद ऐसे ही चलती होगी, तो भारतीयों को अब उनके लोकप्रतिनिधियों को कानूनी तौर पर उत्तर पूछना चाहिए ! |
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