
जयपुर (राजस्थान) – यहां के धर्मप्रेमी शिवभक्त श्री. वारिद सोनी के पिता पू. वीरेंद्र सोनी (आयु ८७ वर्ष) ने १३ मई २०२२ को देहत्याग किया । १४ मई को उनका अंतिमसंस्कार किया गया । उनके पश्चात ३ लडके, बहुएं और २ प्रपौत्र, इतना परिवार है । सनातन परिवार सोनी परिवार के दुःख में सहभागी है ।
श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी ने ३० नवंबर २०२१ को पू. वीरेंद्र सोनीजी को संत घोषित किया था । श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी द्वारा वर्ष २०१९ में की गई कैलास-मानसरोवर (मानस सरोवर) यात्रा के श्री. वारिद सोनी मार्गदर्शक थे । पू. वीरेंद्र सोनी घर पर ही भावभक्तिपूर्वक साधना करते थे । उन्होंने धर्मग्रंथों का वाचन कर अंतर से ईश्वर से प्राप्त होनेवाले ज्ञान के आधार पर लेखन किया था । उनमें भगवान शिव के प्रति अचल श्रद्धा थी ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?