श्रीमन्नारायण स्वरूप परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के जन्मोत्सव के निमित्त उनका ‘रथोत्सव’ मनाने के संदर्भ में जीवनाडीपट्टिका के माध्यम से सप्तर्षियों द्वारा प्राप्त मार्गदर्शन !

१. गुरुदेवजी का रथोत्सव मनाते समय रथ में श्रीमन्नारायण स्वरूप गुरुदेवजी के आध्यात्मिक आसन के समक्ष दाईं ओर श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी एवं बाईं ओर श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी आसन ग्रहण करें : ‘गुरुदेवजी की जन्मतिथि पर हमें गुरुदेवजी का रथोत्सव मनाना है । इस रथोत्सव में गुरुदेवजी रथ में विराजमान हों और उनके निकट एक शंख रखें । इस रथ में श्रीमन्नारायणस्वरूप गुरुदेवजी के आध्यात्मिक आसन के समक्ष दाईं ओर श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी एवं बाईं ओर श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी आसन ग्रहण करेंगी । श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी श्रीमन्नारायणस्वरूप गुरुदेवजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी हैं ।’ – सप्तर्षि (पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी के माध्यम से, सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका वाचन क्र. १९७, ७.३.२०२२)

२. गुरुदेवजी के रथोत्सव का आनंद लेने के लिए आतुर देवी-देवता, ऋषि, सप्तर्षि एवं विष्णु का वाहन गरुडदेवता : ‘स्वर्गलोक के सर्व देवी-देवता, उनके गण एवं ॠषि लोक के ८८,००० ॠषि ‘श्रीमन्नारायण के अंशावतार सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी कब रथ पर आरूढ होकर आएंगे और कब हमें उनके इस नारायण रूप के दर्शन होंग’, इस दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं । पृथ्वी पर श्रीमन्नारायणस्वरूप गुरुदेवजी के इस रथोत्सव के समय सर्व देवी-देवता, ॠषि, सप्तर्षि उपस्थित रहेंगे । विष्णुवाहन गरुड देवता सामान्य गरुड के रूप में आकर रथोत्सव परिसर में उडान भरेगा । साधकों को पशु-पक्षियों के रूप में दैवी संकेतमिलेगा । श्रीमन्नारायण का यह रथ पृथ्वी पर साकार होने की हम सप्तर्षि अनेक सहस्रों वर्ष से प्रतीक्षा कर रहे हैं ।’ – सप्तर्षि (पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी के माध्यम से, सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका वाचन क्र. १९६, ३.२.२०२२)

३. रथोत्सव के समय सनातन के तीन गुरुओं द्वारा धारण किए जानेवाले वस्त्रों के विषय में

अ. रथोत्सव में गुरुदेवजी ‘कनकपुष्कराज’ (Yellow Sapphire) जिसे हिन्दी में पुखराज कहते हैं, उस रत्न के रंग के समान अर्थात सुनहरे पीले रंग के वस्त्र धारण करें ।

आ. श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) सिंगबाळजी पन्ना रत्न के समान (Green Emerald) हरे रंग के वस्त्र धारण करें ।

इ. श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) गाडगीळजी बिल्लौर रत्न के रंग के समान (Amethyst Stone) अर्थात जामुनी रंग के वस्त्र धारण करें ।’

– सप्तर्षि (पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी के माध्यम से, सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका वाचन क्र. १९७, ७.३.२०२२)

४. साधक रथोत्सव के प्रति जैसा भाव रखेंगे, वैसा फल मिलेगा ! : ‘गर्भगृह में रखी मूल मूर्ति के दर्शन करने भक्त मंदिर में जाते हैं । किसी कारण सभी भक्तों को मंदिर जाकर दर्शन करना संभव नहीं होता । इसीलिए देवताओं का रथोत्सव मनाने की प्रथा है । भगवान रथ में विराजमान होने से और रथ का गांव में मार्गक्रमण होने से भगवान के सबको दर्शन होते हैं । सभी साधक, भक्त मन तृप्त होने तक दर्शन कर पाएं, इसलिए हम सप्तर्षियों ने परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का रथोत्सव मनाने के लिए कहा है । रथ में विराजमान श्रीमन्नारायण के अंशावतार परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीके प्रति जिसका जैसा भाव होगा, वैसा उस जीव को फल मिलेगा । रथ में साक्षात् श्रीमन्नारायण विराजमान हैं, ऐसा भाव रखेंगे, तो श्रीविष्णु के आशीर्वाद मिलेंगे व यदि रथ में ‘गुरु’ विराजमान हैं, ऐसा भाव रखेंगे, तो वैसा आशीर्वाद मिलेगा । जिसका जैसा भाव होगा, उसके अनुसार ईश्वर ‘तथास्तु’ कहेंगे । जो श्रीमहाविष्णु त्रेतायुग में श्रीराम रूप में आए, द्वापरयुग में श्रीकृष्ण के रूप में आए, वही अब परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के रूप में जन्मे हैं तथा वही कलियुग के इस चरण में धर्मसंस्थापना करेंगे, यही त्रिवार सत्य है ।’ – सप्तर्षि (पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी के माध्यम से, सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका वाचन क्र. २०१, १३.५.२०२२)

५. ‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी कलियुग की दैवी विभूति हैं’, यह विश्व को बताने का समय आ गया है इसलिए श्रीमन्नारायण स्वरूप गुरुदेवजी का ‘रथोत्सव’ मनाया जा रहा है ! : ‘जो अध्यात्म के शिखर पर हैं, ज्ञानी लोगों में जो सर्वाधिक ज्ञानी हैं, जिनमें अन्य जीवों पर अनुग्रह करने की क्षमता है, जिन्हें अहंकारी जीवों का अहं घटाने का रहस्य ज्ञात है, जो वैद्यों के भी वैद्य हैं, जिनकी करुणा के लिए कोई उपमा नहीं, ऐसे परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी कलियुग की एक दैवी विभूति हैं । अब यह पूरे विश्व को बताने का समय आ गया है । इसीलिए इस वर्ष श्रीमन्नारायणस्वरूप गुरुदेवजी का यह रथोत्सव किया जा रहा है ।’ – सप्तर्षि (पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी के माध्यम से, सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका वाचन क्र. २०१, १३.५.२०२२)

६. रथोत्सव में ‘श्रीराम शालीग्राम’ पालकी सम्मिलित करने के विषय में सप्तर्षियों द्वारा बताए सूत्र

६ अ. श्रीराम नवमी के दिन नेपाल से हिमालय में स्थित शालीग्राम क्षेत्र, दामोदर कुंड से श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) गाडगीळजी को ‘श्रीराम शालीग्राम’ प्राप्त हुआ : ‘१०.४.२०२२ को श्रीराम नवमी के दिन नेपाल से हिमालय में स्थित शालीग्राम क्षेत्र, दामोदर कुंड से श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) गाडगीळजी को ‘श्रीराम शालीग्राम’ प्राप्त हुआ । १५.४.२०२२ को चेन्नई में हुए १९८ वें सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका वाचन के समय श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) गाडगीळजी यह शालीग्राम पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी को दिखाने के लिए ले गए थे । इस समय सप्तर्षियों ने इस शालीग्राम के विषय में आगे दिए सूत्र बताए ।’ – श्री. विनायक शानभाग

६ आ. सत्ययुग में शालीग्राम इस पृथ्वी पर श्रीविष्णु का साक्षात् रूप है ! : ‘शालीग्राम पृथ्वी पर श्रीविष्णु का साक्षात रूप है । आज के रथोत्सव में श्रीमन्नारायणस्वरूप गुरुदेवजी के रथ के समक्ष एक पालकी हो । इस पालकी में दामोदर कुंड से प्राप्त हुआ ‘श्रीराम शालीग्राम’ रखें । श्रीविष्णु की कृपा से सनातन संस्था को ‘स्वर्ण रेखा युक्त श्रीराम शालीग्राम’ प्राप्त हुआ है । शालीग्राम पर एक स्वर्ण रेखा है । वह साक्षात् श्रीविष्णु की रेखा है । वह श्रीविष्णु की ब्रह्मांड चलानेवाली ब्रह्मनाडी ही है । भगीरथ के प्रयासों के कारण ‘गंगा’ शिवजी की जटा से पृथ्वी पर आई । ‘श्रीराम शालीग्राम’ शिवजी की जटा में स्थित गंगा के प्रवाह में निर्मित शालीग्राम है । यह शालीग्राम सत्ययुग में ही पृथ्वी पर आया ।

६ इ. कलियुग में भगवान को सनातन के तीन गुरुओं से स्वयं की पूजा करवानी है, इसलिए वे शालीग्राम के रूप में सनातन के पास आए हैं । कलियुग में रामराज्य की स्थापना हेतु यह शालीग्राम प्रकट हुआ है ।’

– सप्तर्षि (पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी के माध्यम से, सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका वाचन क्र. १९८, १५.४.२०२२)

महर्षि की ‘हिन्दू राष्ट्र-स्थापना’ के विषय में भविष्यवाणी !

‘महर्षि कहते हैं, ‘साधकों के मन में प्रश्न आता है कि ‘हिन्दू राष्ट्र कब आएगा ?’ बालक का जन्म ७ वें मास में भी हो सकता है या ९ वें मास में भी । ७ वें मास में जन्मे बालक में कई बार कुछ न्यूनताएं पाई जाती हैं । ९ वें मास में जन्मा बालक सुदृढ रहता है । ‘हिन्दू राष्ट्र’ भी एक बालक है । ‘हमें ७ वें मास में जन्मा बालक चाहिए या ९ वे मास में ?’, यह आप ही निश्चित करें । अच्छा एवं सुदृढ बालक चाहिए, तो हमें और कुछ समय प्रतीक्षा करनी होगी । पहाड पर तेज गति से चढने पर नीचे उतरते समय अधिक कष्ट होता है और धीरे-धीरे चढें, तो कष्ट कम होता है ।’

(‘महर्षि ने हिन्दू राष्ट्र की तुलना नवजात शिशु से की है । महर्षि ने हिन्दू राष्ट्र को सुंदर उपमा दी है एवं ‘हिन्दू राष्ट्र आने ही वाला है’, इस विषय में साधकों को आश्वस्त किया है ।’ – संकलनकर्ता) – सप्तर्षि (पू. डॉ. ॐ उलगनाथनजी के माध्यम से, सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका वाचन क्र. १९७ (७.३.२०२२)