
वर्तमान में तिथि लिखते समय हम चैत्र शु.प. १ (चैत्र शुक्ल पक्ष १) ऐसे लिखते हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ‘पक्ष’ इस अर्थ से लिखा जानेवाला ‘प.’ शब्द अनावश्यक है । प्रचलित लेखन में भी तिथि लिखते समय इसका उल्लेख नहीं किया जाता । दूसरे यह कि, चैत्र शु.प. १ शब्दप्रयोग में चैत्र मास हैे; परंतु तिथि में हम मास इस अर्थ से मा. ऐसा चैत्र के आगे नहीं लिखते । जिस प्रकार हम मास (महिना) कालवाचक शब्द तिथि में लिखते समय टालते हैं, उसी प्रकार पक्ष कालवाचक शब्द भी लिखते समय टाल सकते हैं । अत: पिछले कुछ महिनों से हम तिथि चैत्र शु. १ ऐसे लिखते हैं ।
– सुश्री (कुमारी) सुप्रिया शरद नवरंगे, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (९.३.२०२२)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?